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कब है गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जानें

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पंकज झा शास्त्री ( मधुबनी) 
1 जून को गंगा दशहरा और 2 जून 2020 को निर्जला एकादशी- 


गंगा दशहरा के दिन गंगाजल से स्नान करना श्रेयस्कर होता है। लेकिन इस बार घर पर रहकर ही आपको यह पर्व मनाना होगा। इसके लिए नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दें। फिर ॐ श्री गंगे नमः मंत्र का उच्चारण करते हुए मां गंगे का ध्यान कर अर्घ्य दें। मां गंगा की पूजा करने के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा जरूर दें।
इन दस प्रकार के पापों का हरण करती है मां गंगा: शास्त्रों के अनुसार गंगा दशहरा के इस पावन दिन गंगा जी में स्नान-ध्यान एवं पूजन-उपवास करने से व्यक्ति दस प्रकार के पापों से छूट जाता है। इनमें तीन प्रकार के दैहिक, चार वाणी के द्वारा किए हुए पाप एवं तीन मानसिक पाप शामिल है। गंगा में स्नान करते समय ”ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः” मंत्र का स्मरण करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन दान स्वरूप दस वस्तुओं का दान देना कल्याणकारी माना गया है।
ऐसे धरती पर आईं माँ गंगा: पदमपुराण के अनुसार आदिकाल में ब्रह्माजी ने सृष्टि की ‘मूलप्रकृति’ से कहा-”हे देवी! तुम समस्त लोकों का आदिकारण बनो, मैं तुमसे ही संसार की सृष्टि प्रारंभ करूँगा”। ब्रह्मा जी के कहने पर मूलप्रकृति-गायत्री, सरस्वती, लक्ष्मी, उमादेवी, शक्तिबीजा, तपस्विनी और धर्मद्रवा इन सात स्वरूपों में प्रकट हुईं। इनमें से सातवीं ‘पराप्रकृति धर्मद्रवा’ को सभी धर्मों में प्रतिष्ठित जानकार ब्रह्मा जी ने अपने कमण्डलु में धारण कर लिया।
राजा बलि के यज्ञ के समय वामन अवतार लिए जब भगवान विष्णु का एक पग आकाश एवं ब्रह्माण्ड को भेदकर ब्रह्मा जी के सामने स्थित हुआ, उस समय अपने कमण्डलु के जल से ब्रह्माजी ने श्री विष्णु के चरण का पूजन किया। चरण धोते समय श्री विष्णु का चरणोदक हेमकूट पर्वत पर गिरा। वहां से भगवान शिव के पास पहुंचकर यह जल गंगा के रूप में उनकी जटाओं में समा गया। गंगा बहुत काल तक शिव की जटाओं में भ्रमण करती रहीं। तत्पश्चात सूर्यवंशी राजा भगीरथ ने अपने पूर्वज सगर के साठ हज़ार पुत्रों का उद्धार करने के लिए शिवजी की घोर तपस्या की। भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर गंगा को पृथ्वी पर उतार दिया। उस समय गंगाजी तीन धाराओं में प्रकट होकर तीनों लोकों में चली गयीं और संसार में त्रिस्रोता के नाम से विख्यात हुई
ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाने का विधान है। माना जाता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थीं। धार्मिक दृष्टि से इस दिन गंगा में स्नान करने और दान करने का अत्याधिक महत्व माना जाता है।
 ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाता है। इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। कहा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति 24 एकादशी व्रत नहीं रख पा रहा हो तो वह निर्जला एकादशी व्रत को करके सभी एकादशी व्रत धर्म के हकदार हो जाता है, साथ ही शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है।

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