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सूर्य प्रकाश पिण्ड है, जिसके चारों ओर ग्रह घूम रहे हैं जानें

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पंकज झा शास्त्री 

मिथिला हिन्दी न्यूज :-वेसे तो कई विद्वानजन लोग सुर्य को ग्रह के रुप मे देखते है ,इस विषय पर उनका क्या आधार है अभी हम इसपर विशेष चर्चा नही करेंगे परंतु मै सुर्य को ग्रह के रुप में नही देखता हां सुर्य को हम एक पिण्ड जरुर कह सकते है ।
ग्रह मै उसे मानता हुँ जो दुसरे से प्रकाशित हो ।सुर्य स्वयं प्रज्वलित होकर दुसरे को प्रकाशित करता है । सूर्य हमारे ऊर्जा का स्त्रोत है। इन्हीं के कारण हम ऊर्जा वान रहते हैं। प्रकृति का सुचारु रूप से चलना भी सूर्य के ही ज़िम्मे है। इसी प्रकृति का हिस्सा हम भी हैं। जिसके चलते इनका प्रभाव हम पर पड़ता है। ज्योतिष के अनुसार जिस जातक की कुंडली में सूर्य लग्न में विराजमान होते हैं उसका चेहरा बड़ा और गोल तथा आँखों का रंग शहद के समान होता है। जातक के शरीर में सूर्य हृदय को दर्शाता है। काल पुरुष कुंडली में अंतर्गत सिंह राशि हृदय को इंगित करती है। शारीरिक संरचना व ज्योतिष के अनुसार सूर्य पुरुषों की दायीं आँख व स्त्रियों की बायीं आँख को दर्शाता है।
 ज्योतिष के मुताबिक यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य बली है तो जातक अपने जीवन में सभी लक्ष्यों की प्राप्ति करता है। जातक के अंदर गजब का साहस देखने को मिलता है। इसके साथ वह प्रतिभावान व नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण होता है। जीवन में उसे मान सम्मान की कमी नहीं होती। जातक ऊर्जावान, आत्म-विश्वासी व आशावादी होगा। जातक उपस्थिति के कारण घर में ख़ुशी, आनंद का माहौल बना रहा है। जातक दयालु होता है। रहन सहन शाही हो जाती है। ऐसे जातक अपने कार्य व संबंधों के प्रति काफी वफ़ादार होते हैं। कुंडली में सूर्य (sun) का उच्च व प्रभावी होना सरकारी नौकरी की ओर इशारा करता है। जातक जीवन में उच्च पद प्राप्त करता है।जिस जातक की कुंडली में सूर्य पीड़ित होते हैं या प्रभावी नहीं होते हैं उन जातकों पर इसका गहरा असर पड़ता है। ऐसे में जातक अहंकारी हो जाता है। क्रोध जातक की नाक पर सवार रहती है। जिसके कारण उसके कई काम बिगड़ जाते हैं। जातक छोटी –छोटी बातों को लेकर उदास हो जाते हैं। इसके साथ ही वे किसी पर भी विश्वास नहीं कर पाते हैं। जातकों के अंदर ईर्ष्या व्याप्त हो जाता है। जातक महत्वाकांक्षी होने के साथ आत्म केंद्रित भी बन जाते हैं। जिसके कारण इनकी सामाजिक प्रतिष्ठा में भी कमी आती है।वेसे तो जातक के राशि पर सुर्य के प्रभाव का आकलन जन्म कुंडली के अध्यन के बाद ही बताया जा सकताहै ।अक्सर लोगो का मानना है कि सुर्य सभी को एक समान प्रभाव देता है सुर्य के लिये सभी एक समान है ।यह सत्य है कि सुर्य सभी को अपने और से एक समान प्रकासित करता है परंतु यह भी सत्य है कि सभी कोई सुर्य के प्रभाव को एक समान सहन नही कर पाते और यह प्रमाणित है ।

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