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समाज में बराबरी लाना चाहते थे रामस्वरूप वर्मा : पथिक अर्जक संघ ने मनाया क्रांति दिवस

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आलोक वर्मा / अनुराधा भारती
नवादा : नवादा जिले के अंतर्गत हिसुआ प्रखंड में  जाने माने समाज सुधारक और मानववादी दार्शनिक महामना रामस्वरूप वर्मा समाज में जीवन के सभी क्षेत्रों में बराबरी लाना चाहते थे । इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने 1 जून 1968 को अर्जक संघ की स्थापना की थी । उक्त बातें आज  अर्जक संघ सांस्कृतिक समिति के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र पथिक ने क्रांति दिवस के अवसर पर कही।
श्री पथिक ने कहा कि सामाजिक, सांस्कृतिक,आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में भारी विषमता है। अंधविश्वास और कुरीतियों की भरमार है । इसे मिटाकर मानववादी व्यवस्था लाने के लिये अर्जक संघ प्रयासरत है।  
उन्होंने कहा कि वर्मा जी उत्तर प्रदेश में छ बार विधायक चुने गये। गैर कांग्रेसी सरकार में वित्तमंत्री रहे।डॉ लोहिया जी के साथ सोसलिस्ट पार्टी में में रहे बाद में शोषित समाज दल की स्थापना करके समाजवादी आंदोलन को बढ़ावा दिया। अर्जक संघ स्थापित करके मानववादी आचार, विचार ,संस्कार और त्योहार प्रदिपादित किया। 
संघ के प्रखंड संयोजक अश्विनी कुमार वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि सम, निशुल्क अनिवार्य और वैज्ञानिक शिक्षा लागू करने से तथा खान-पान, उठन-बैठन और बोलचाल में समानता लाने से ही समाज सुखी और समृद्ध हो सकेगा।
शोषित समाज दल बिहार के संसदीय  समिति के प्रदेश अध्यक्ष प्रो॰ उमाकांत राही ने कहा कि महामना रामस्वरूप वर्मा ने 1972 में जगदेव प्रसाद के साथ मिलकर शोषित समाज दल की स्थापना करके देश में  पिछड़े दलितों और अल्पसंख्यकों के विकास का पथ प्रशस्त किया । देश में सही माने में समाजवादी आंदोलन चलाने का मार्ग दिखाया। उनसे आज के सभी राजनीतिज्ञों को सीखना चाहिये। वर्मा जी ने उत्तर प्रदेश में 1967 में वित्तमंत्री रहते हुए बगैर कोई नया कर लगाये मुनाफा का बजट पेश करके इतिहास कायम किया।  मंत्रालय से अंग्रेजी के सभी टाइपराइटर हटाकर हिंदी टाइपराइटर  रखवाया। सरकार द्वारा जब्त डॉ अंबेडकर की लिखी पुस्तकों को हाइ कोर्ट से लड़कर सभी पुस्तकालयों में रखवाया। मानववादी विचार, आचार, संस्कार और त्योहार को अपनाने के लिये व्यवस्था प्रतिपादित किया। 
श्री राही ने कहा कि वर्मा जी को तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश की थी पर उन्होंने कांग्रेसी कल्चर का विरोध करते हुए ठूकरा दिया। 
समारोह को अन्य अर्जकों के अलावा  मुकेश मांझी , सौरभ राजा, शंकर मांझी, श्रीकांत कुशवाहा,संतोष मांझी, सुग्गी देवी आदि ने वर्मा जी के व्यक्तित्व और कीर्तित्व की चर्चा करते हुए रामस्वरूप वर्मा के विचारों को अपनाने पर बल दिया। समारोह का समापन अर्जक नेता सकलदेव मांझी ने किया।

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