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नाराज राजपूत समुदाय, हर साल देते रहे वोट इनको और बदले में मिला अपमान पढ़िए पूरी दास्तान

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अनूप नारायण सिंह 


मिथिला हिन्दी न्यूज : यु तो महराणा प्रताप जयंती बहुत धूम धाम से नितीश जी ने मनाया था लेकिन जब बात हुई टिकट को बटवारे को लेकर तो फिर से राजपूत समुदाय के पीठ में छुरा भोका गया और बांका , जमुई ,मुंगेर और पहले चरण में हुए किसी भी जगह एक भी राजपूत उमीदवार को टिकट नहीं दिया गया।  
राजपूत समुदाय ने हमेशा से नितीश सरकार का साथ दिया है और नितीश जी ने भी हमेशा से भरोसा भी दिया था की राजपूत समुदाय को उचित भागीदारी मिलेगी। ऐसा ज्ञात है की आनंद मोहन जी ने भी नितीश जी के इसी निति का विरोध करते हुए पिछले १० सालो से दुरी बनाये रखी है। माननीय नितीश जी ने महराणा प्रताप जयंती पर बार बार भरोसा दिलाया था और राजपूत समुदाय भी ने नगारे बजा कर इसका स्वागत भी किया था।  
पहले चरण के चुनावो की लिस्ट जारी होते ही जमुई और उसके आस पास के विधान सभा में राजपूत समुदाय को काफी आश्चर्य हुएजब उन्होंने माननीय विजय सिंह जी का नाम नदारद पाया। सनद है की विजय सिंह जी जमुई और आस पास के छेत्र में काफी लोकप्रिय है और वर्तमान में विजय सिंह जी " बिहार स्टेट हाउसिंग कोऑपरेशन बैंक " के अध्यक्ष भी है। राजपूत समुदाय नितीश जी के इस निर्णय से काफी मर्माहत है। ज्ञात है की दरअसल राजपूतों की आबादी बिहार में करीब 6 से 8 फीसदी है. बिहार के करीब 30 से 35 विधानसभा क्षेत्र में राजपूत जाति जीत या हार में निर्णायक भूमिका निभाती रही है। दरअसल करीब 8 महीने पहले 20 जनवरी 2020 को राजधानी पटना के मिलर स्कूल में महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर स्मृति समारोह का आयोजन था जिसमें बड़ी संख्या में राजपूत समाज के लोग मौजूद थे. इसी समारोह में सीएम नीतीश के भाषण के दौरान राजपूत के नेता माने जाने वाले और कोसी क्षेत्र में दबदबा रखने वाले जेल में बंद बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई की मांग उठी, तो सीएम नीतीश कुमार को आनंद मोहन की रिहाई का भरोसा देना पड़ा था लेकिन अभी तक आनंद मोहन की जेल से रिहाई नहीं हो पाई और आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और बेटे चेतन आनंद ने आरजेडी का दामन थाम लिया. उसी मंच पर नितीश जी ने भरोसा दिलाया था की बिहार की राजनीत्ति में राजपूत समुदाय को उनका हक़ मिलेगा। 
राजपूत समाज से आने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह को लंबे समय से जदयू ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया हुआ है. कांग्रेस ने भी राजपूत समाज पर पकड़ बनाने के लिए पहले शक्ति सिंह गोहिल को प्रदेश कांग्रेस का प्रभारी बनाया और फिर समीर सिंह को एमएलसी बनाया. जाहिर है राजपूत समाज को अपने पाले में लाने की कोशिश में सभी सियासी दल जुटे हैं।

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