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राशि अनुसार मां भगवती के पुजन वंदन अति सीघ्र फलदाई

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पंकज झा शास्त्री 


मिथिला हिन्दी न्यूज :-हम सभी 2020 के शारदीय नवरात्र की तयारी कर रहे है और यह लगभग अब तैयारी अंतिम चरण में है। शास्त्र अनुसार इस बार मां दूर्गा आगमन घोड़ा पर कर रही है जबकि गमन भैसा से है। श्रद्धा एवं विश्वास के साथ मां दूर्गा का पूजा आराधना करना निश्चित कल्याणकारी है और यदि राशि अनुसार मां के स्वरूपों का निष्ठा पूर्वक पूजा अर्चना करे तो यह और अति उत्तम है। जानते है अपने राशि अनुसार किस देवी की आराधना से अति सीघ्र सकारात्मक मिल सकता है।
पंकज झा शास्त्री 9576281913

 1.मेष राशि- राशि के जातक इस नवरात्र जीवन प्रबंधन में दृढ़ता, स्थिरता एवं अपने आप को शक्तिमान बनाने के लिए माता दुर्गा के शैलपुत्री रूप की पूजा करने से श्रेष्ठ और मंगलकारी जीवन की प्राप्ति होती है।

2- वृषभ-  राशि के लोगों को महागौरी स्वरूप की उपासना से विशेष फल प्राप्त होते हैं। ललिता सहस्र नाम का पाठ करें। जन-कल्याणकारी है। अविवाहित कन्याओं को आराधना से उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

3- मिथुन- इस राशि के लोगों को देवी यंत्र स्थापित कर ब्रह्मचारिणी की उपासना करनी चाहिए साथ ही तारा कवच का रोज पाठ करें। मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान प्रदाता व विद्या के अवरोध दूर करती है।

4- कर्क-राशि के लोगों को शैलपुत्री की पूजा-उपासना करनी चाहिए। लक्ष्मी सहस्रनाम का पाठ करें। भगवती की वरद मुद्रा अभय दान प्रदान करती है।

5- सिंह-  राशि के लिए मां कूष्मांडा की साधना विशेष फल करने वाली है। दुर्गा मंत्रों का जप करें। ऐसा माना जाता है कि देवी मां के हास्य मात्र से ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। देवी बलि प्रिया हैं, अत: साधक नवरात्र की चतुर्थी को आसुरी प्रवृत्तियों यानी बुराइयों का बलिदान देवी के चरणों में निवेदित करते हैं।

6- कन्या- इस राशि के लोगों को मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करना चाहिए। लक्ष्मी मंत्रों का साविधि जप करें। ज्ञान प्रदान करती हुई विद्या मार्ग के अवरोधों को दूर करती हैं। विद्यार्थियों हेतु देवी की साधना फलदाई है।

7- तुला-  राशि के लोगों को महागौरी की पूजा-आराधना से विशेष फल प्राप्त होते हैं। काली चालीसा या सप्तशती के प्रथम चरित्र का पाठ करें। जन-कल्याणकारी हैं। अविवाहित कन्याओं को आराधना से उत्तम वर की प्राप्ति होती है।

8- वृश्चिक-  राशि के लोगों को स्कंदमाता की उपासना श्रेष्ठ फल प्रदान करती है। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

9- धनु- इस राशि वाले मां चंद्रघंटा की उपासना करें। संबंधित मंत्रों का यथाविधि अनुष्ठान करें। घंटा प्रतीक है उस ब्रह्मनाद का, जो साधक के भय एवं विघ्नों को अपनी ध्वनि से समूल नष्ट कर देता है।

10- मकर-  राशि के जातकों के लिए कालरात्रि की पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। नर्वाण मंत्र का जप करें। अंधकार में भक्तों का मार्गदर्शन और प्राकृतिक प्रकोप, अग्निकांड आदि का शमन करती हैं। शत्रु संहारक है।

11- कुंभ-  राशि वाले व्यक्तियों के लिए कालरात्रि की उपासना लाभदायक है। देवी कवच का पाठ करें। अंधकार में भक्तों का मार्गदर्शन और प्राकृतिक प्रकोपों का शमन करती है।

12- मीन- राशि के लोगों को मां चंद्रघंटा की उपासना करनी चाहिए। हरिद्रा (हल्दी) की माला से यथासंभव बगलामुखी मंत्र का जप करें। घंटा उस ब्रह्मनाद का प्रतीक है, जो साधक के भय एवं विघ्नों को अपनी ध्वनि से समूल नष्ट कर देता है।

नोट - सर्व प्रथम गणेश पुजन वंदन के बाद उपरोक्त्त किसी भी देवी की पूजा आराधना के साथ शिवजी की पूजा आराधना करना न भूले।कारण शिव के बिना शक्ति की आराधना अधूरी है। अतः शक्ति के साथ शिव की आराधना से अति सीघ्र सकारात्मक मिल सकता है।

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