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मोतिहारी पूर्वी चंपारण वोटरों के लिए आसान नहीं सही प्रत्याशी का चयन

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 प्रिंस कुमार

मतदाताओं के समक्ष फिलहाल असमंजस की स्थिति है कि वे किस राह पर जाएं। इधर जाती है तो उधर सेवा और विकास के दावे ।वादों की बरसात ने अलग उलझन पैदा कर दी है और भरोसा करें तो किस पर ।वैसे बिहार के संदर्भ में अवधारणा बदली है ।यह प्रदेश विकास के रास्ते की जटिलताओं को घकियाते हुए आगे निकल रहा है, लेकिन इस चुनाव में भी जातीय गणित का फार्मूला फिट करने की कसरत जारी है। किस चेहरे के सामने कौन के लिए दूसरे दलों के लोगों को भी प्रत्याशी बनाने में झिझक नहीं। चुनाव जीतना है तो यही राह आसान है।वोटों की इस घेरेबंदी में विचारधारा धूल धूसरित है। हालात यह है कि हंसते-हंसते कई चेहरे रोने लगे हैं। जाति की वजह से टिकट कट गया ।दूसरी ओर कुछ ऐसे चेहरे भी प्रकट हो रहे हैं, जो चुनाव के पूर्व क्षेत्र विशेष में कभी गए नहीं। उनके पास जाति प्रमाण पत्र के साथ धनबल है। यही पहचान लेकर मतदाताओं के सामने होंगे। विकास और विचारधारा बाद की बात है, पहले सरकार तो बना ले। मतदाता समझते हुए भी कुछ समझ नहीं पा रहे हैं। बड़ा सवाल कि नेताओं की बड़ी-बड़ी बातें इस मुकाम पर दम क्यों तोड़ देती है ।कहीं पिछली उपलब्धियों का पिटारा खोला जा रहा तो कहीं विकास के बड़े वादे किए जा रहे हैं।कोई अगला मौका मांग रहा तो कोई पहला मौका देकर आजमाने की अर्जी दे रहा। इन्हीं लोग लुभावने रास्तों से मतदाता को मतदान की राह बनानी है। जाहिर है, उसे विवेक को सारथी बनाना होगा ,ताकि सही बटन पर अंगुली रख सके। कुछ पूर्व के आजमाए हुए हैं तो कुछ वर्तमान के।आकलन कर हिसाब तो बिठाना ही होगा। यह मुकाम खुद और समाज के साथ-साथ राज्य के लिए निर्णय का है। थोड़ी माथापच्ची करनी होगी। खुद से सवाल करने होंगे, जाति ने क्या दिया, धनकुबेरों ने क्या दिया,बड़े-बड़े वादे करने वालों ने क्या दिया, सेवा के भाव गिरे या संतुलन बना हुआ है? इन सवालों के जवाब ही मतदाता की सही राह दिखाएंगे। हर चुनाव की तरह इस बार भी बदलाव के नारे दिए जा रहे हैं। इस बदलाव का दायरा सिर्फ सत्ता तक केंद्रित है। खालीस चुनाव ही है। इसमें सामाजिक विषमता या जड़ता को तोड़ बदलने के तत्व नहीं है। यदि होते तो बिहार के चुनाव दूसरे प्रदेशों के लिए राजनीतिक आदर्श के उदाहरण बनते। जातीय संकीर्णता के दलदल ने इसे फिर ग्रस्त लिया। इस सोच को जनता ही बदल सकती है। उसे ही नेताओं को जवाब देना है ।उसे बताना है कि न तो वह भूमिहार है और न राजपूत, ब्राह्मण, यादव या कोई अन्य जाति। वह संपूर्ण बिहार है। कोई उसे बरगला नहीं सकता ।धोखे में नहीं रख सकता

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