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चुनावी पड़ताल : मोरवा विधानसभा क्षेत्र में राजद टक्कर को तैयार, निषाद समाज का फिर भरोसा जीत पाएगी जदयू

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मोरवा/संवाददाता/विशेष रिपोर्ट


मोरवा विधानसभा क्षेत्र जननायक कर्पूरी ठाकुर का कर्म क्षेत्र रहा है,आजादी के बाद हुए चुनाव में मोरवा, ताजपुर विधानसभा क्षेत्र का अंग था। ताजपुर विधानसभा क्षेत्र को भंग कर दिए जाने के बाद इसे सराय रंजन विधानसभा क्षेत्र में मिला दिया गया था।जननायक कर्पूरी की कर्मभूमि होने के बावजूद मोरवा विधानसभा क्षेत्र की पहचान निषाद विधानसभा क्षेत्र के रूप में ही बन चुकी है। अपनी जातिगत कट्टरता के कारण निषाद समुदाय के सभी मतदाता अन्य किसी भी दलों की बजाय केवल अपनी ही जाति के प्रत्याशी को वोट करते आ रहे हैं। इसीलिए सभी दलों के लोग निषाद जाति के ही प्रत्याशी के प्रति अपना विश्वास व्यक्त करते आ रहे हैं, फलस्वरूप अब तक राजद और जदयू से भी केवल निषाद जाति के ही विधायक होते आ रहे हैं। यही कारण रहा है कि वर्ष 1995 से आज तक सभी विधायक निषाद समुदाय के ही होते आ रहे हैं।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में वर्ष 2010 में मोरवा विधानसभा क्षेत्र का स्वतंत्र रूप से अस्तित्व प्रदान किया गया।जननायक कर्पूरी ठाकुर का कर्म क्षेत्र रहने से यहां सभी दलों के प्रत्याशी उम्मीदवार बनने को लालायित रहते हैं। बावजूद निषाद प्रत्याशी को प्राथमिकता दिए जाने से अब तक केवल निषाद समुदाय के ही सभी विधायक बने हैं।इस बार के चुनाव के लिए जदयू के राष्ट्रीय सचिव एवं मोरवा विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक विद्यासागर सिंह निषाद जदयू से टिकट मिलने और और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आशीर्वाद प्राप्त होने के विश्वास के साथ,विजय श्री प्राप्त करने के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हैं। जबकि महागठबंधन के तहत राजद नेता पूर्व विधायक रामचंद्र सिंह निषाद पूर्व से ताल ठोक रहे हैं। क्योंकि अपनी स्वच्छ छवि और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद तथा बीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी दोनों के चहेते होने के प्रति उन्हें पूरा विश्वास है।तो सराय रंजन सहित मोरवा से पूर्व मंत्री रामाश्रय सहनी सहनी, राजद के प्रखंड अध्यक्ष दिनेश चौधरी , पूर्व जिला पार्षद अमीर सहनी, अंजय मेहता, सहित कई दर्जन लोग राजद से प्रत्याशी बनने को इच्छुक हैं। महागठबंधन के वीआईपी पार्टी के जिलाध्यक्ष अभय कुमार सिंह पूर्व से ही चुनाव लड़ने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी में लगे हुए हैं। वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी उन्हें अपना विश्वस्त समझते हैं।इसीलिए अभय कुमार सिंह को भी वीआईपी की पार्टी का पूरा भरोसा है। जन अधिकार पार्टी से अवकाश प्राप्त शिक्षक सूर्य नारायण सहनी कई महीने पूर्व से ही चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इन्हें जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव का पूरा साथ मिलने का भरोसा है। वर्ष 2015 के चुनाव में मोरवा विधायक विद्यासागर सिंह निषाद से पराजित हो चुके भाजपा प्रत्याशी सुरेश राय अपनी गोटी फिट करने में लगे हुए हैं। तो भाजपा से ही पूर्व मंत्री वैद्यनाथ सहनी टिकट मिलने से पूर्व से ही चुनाव प्रचार शुरू किए हुए हैं। दोनों को ही भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का भरोसा होने का दावा है।आप पार्टी से सत्येंद्र कुमार राय अपना चुनाव प्रचार जारी रखे हुए हैं। आप के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पूरा भरोसा इन्हें प्राप्त है।समता पार्टी के दौर से ही जदयू के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष जय कृष्ण राय किसी भी दल से या निर्दलीय भी चुनाव प्रचार जारी रखते हुए चुनाव लड़ने को तैयार बैठे हैं। इन्हें निषाद विरोधी मोरवा के मतदाता का वोट मिलने का पूरा भरोसा है। वर्षों से डीलर संघ के अध्यक्ष रहने वाले दिनेश शर्मा पिछले चुनाव में बसपा से अपना भाग्य आजमा चुके हैं, तो इस बार भी चुनाव में दो-दो हाथ करने को तैयार हैं।इस प्रकार राजग एवं राजद दोनों ही महागठबंधनों से दर्जनों प्रत्याशी चुनाव लड़ने का मंसूबा पाले हुए हैं। किसी भी दल द्वारा टिकट नहीं मिलने पर कई मुख्यमंत्रियों के पायलट रह चुके रामेश्वर राय भी चुनाव लड़ने के लिए भले ही निर्दलीय ही सही ताल ठोक रहे हैं। इस तरह मोरवा में सभी राजनीतिक दलों के लिए प्रत्याशी बनकर सैकड़ों लोग चुनाव लड़ने को तैयार बैठे हैं। विधायक विद्यासागर सिंह निषाद अपनी सत्ताधारी जदयू पार्टी से पूरी तरह टिकट मिलने और जीत के प्रति आश्वस्त हैं, इसीलिए किसी भी दल में पाला बदलने के इच्छुक नहीं दिखाई पड़ रहे। कई प्रत्याशी, लगभग 25 वर्षों से मोरवा विधानसभा क्षेत्र पर एक ही निषाद जाति के विधायक होते रहने के कारण,निषाद विरोधी लहर चलने और अपनी जीत का भी भरोसा अभी से पालने लगे हैं। चुनाव का बिगुल बज चुका है। राजनीतिक दलों के सेनापतियों के चुनावी मैदान में आमने सामने होना बाकी है।

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