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मराठी, कन्नड, गुजराती, तेलगू एवं अंग्रेजी ‘सनातन पंचांग 2021’के एंड्रॉइड एप का विमोचन

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युवा पीढी हिन्दू पंचांग का अवलोकन कर रही है, यह आनंददायी है ! - आचार्य अशोक कुमार मिश्र, वर्ल्ड एस्ट्रो फेडरेशन, बिहार

श्री. गुरुराज प्रभु
    युवा पीढी पंचांग का अवलोकन कर रही है, यह अतिशय आनंद की बात है । भारतीय पंचांग मन की अवस्था से संबंधित है । इसमें प्रत्येक बात का वैज्ञानिक दृष्टि से अध्ययन किया गया है । वैदिक कालगणना अतिशय प्राचीन और अचूक है । ‘सनातन पंचांग’ में महापुरुषों के अवतरण दिवस दिए हैं । जो इन्हें देखता है, वह दृश्य के रूप में उन महापुरुषों को अपनी आंखों के सामने पाता है और उससे प्रेरणा मिलती है । काल अनंत होता है । सनातन धर्म में काल को परमाणु से लेकर महाकल्प तक कालमापन किया गया है । इतना व्यापक अध्ययन अन्य किसी संस्कृति में उपलब्ध नहीं है । सनातन धर्म के ऐसे अनेक तत्त्वों को, वैज्ञानिकता को, सामने लाने की आवश्यकता है । सनातन पंचांग के माध्यम से यह कार्य भली प्रकार से हो रहा है, ऐसा प्रतिपादन बिहार के वर्ल्ड एस्ट्रो फेडरेशन के आचार्य अशोककुमार मिश्र ने किया ।

    हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित ‘हिन्दू कालगणना एवं सनातन पंचांग की विशेषताएं’ इस ऑनलाइन कार्यक्रम में वे बोल रहे थे । इस समय सनातन संस्था निर्मित मराठी, कन्नड, गुजराती, तेलगू एवं अंग्रेजी ‘सनातन पंचांग 2021’ के एंड्रॉइड एप का उद्घाटन किया गया । मराठी एप का प्रसिद्ध पंचागकर्ता श्री. मोहन दाते ने; कन्नड एप का हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी ने; गुजराती एप का पटना (बिहार) स्थित वर्ल्ड एस्ट्रो फेडरेशन के प्रा. आचार्य अशोककुमार मिश्र ने; तेलगू एप का ओडिशा के सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक श्री. अरुणकुमार उपाध्याय ने; और अंग्रेजी एप का लोकार्पण नेपाल के विश्‍व ज्योतिष महासंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. लोकराज पौडेल ने लोकार्पण किया । कुछ दिन पूर्व हिन्दी पंचांग का उद्घाटन मध्यप्रदेश के श्री गुप्तेश्‍वरधाम के पीठाधीश्‍वर डॉ. मुकुंददास महाराज ने किया था । एंड्रॉइड एवं आइओएस प्रणाली पर सभी ‘सनातन पंचांग 2021’ एप https://sanatanpanchang.com/download-apps/ इस लिंक से डाउनलोड करें, ऐसा आवाहन सनातन संस्था ने किया है । इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण फेसबुक और यू-ट्यूब के माध्यम से 36,027 लोगों ने देखा, जबकि 1,34,949 लोगों तक यह विषय पहुंचा ।

    इस समय सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी ने कहा, ‘हिन्दू पंचांग’ हिन्दू धर्म एवं संस्कृति की नींव है । हमने अंग्रेजों और मुगलों को इस देश से भगा दिया; परंतु उसके बाद के राज्यकर्ताओ ने महान हिन्दू कालगणना की उपेक्षा कर अंग्रेजी कालगणना को महत्त्व दिया । यह एक प्रकार से पाश्‍चात्त्यों की सांस्कृतिक गुलामी स्वीकार करना है, इससे देश की बडी हानि हुई है । इस गुलामी से जनता को बाहर निकालकर उनमें हिन्दू धर्म, संस्कृति, भाषा, राष्ट्र आदि के विषय में स्वाभिमान एवं प्रेम निर्माण करने हेतु सनातन संस्था ने वर्ष 2005 से ‘सनातन पंचांग’ बनाना आरंभ किया । इस निमित्त आइए हम सभी निश्‍चय करें, हम अपना जन्मदिन और नवीन वर्ष तिथिनुसार मनाएंगे । इस समय अन्य मान्यवर वक्ताओ ने हिन्दू कालगणना एवं पंचांग का जीवन में महत्त्व बताया ।

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