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टीबी हारेगा, देश जीतेगा अभियान के तहत रोगियों की खोज जारी

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- सीएस ने कहा निजी अस्पताल के डॉक्टर भी टीबी उन्मूलन में करें सहयोग

प्रिंस कुमार 

मोतिहारी, 20 फरवरी|
देश को टीबी मुक्त बनाने के दिशा में पूर्वी चम्पारण जिला भी काफी अग्रसर है। टीबी के इलाज में सफलता हासिल करने के लिए जिले में टीबी हारेगा, देश जीतेगा अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत गांव-गांव तक टीबी रोगियों की खोज की जा रही है। स्वास्थ्य कर्मियों की टीम घर-घर जाकर लोगों का टीबी रोग से संबंधित स्क्रीनिंग व जांच कर रही है। यह बातें सिविल सर्जन डॉ अखिलेश्वर सिंह ने कही। डीएस, सीडीओ डॉ रंजीत राय ने बताया कि पूर्वी चम्पारण के 27 प्रखंडों के पीएचसी में टीबी की जांच व इलाज की सुविधा उपलब्ध है। एक जनवरी से 20 फरवरी तक सरकारी अस्पताल में 231 मरीज चिह्नित किये गए हैं| वहीं निजी चिकित्सा केन्दों में 539 मरीज हैं। एक्स रे टेक्नीशियन ललित कुमार, सुपरवाइजर मुख्यालय नागेश्वर सिंह व अरविंद कुमार ने बताया कि जिले में टीबी मरीजों का अच्छे से इलाज किया जाता है। जब प्रखंडों के स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी होती है तो उसे जिला अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जाता है। 

टीबी का सही समय पर जांच जरूरी
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी ने बताया कि कभी-कभी टीबी के चार लक्षण मिलते हैं। जैसे कफ,बुखार , वजन घटना , रात में पसीने आना । इन सभी लक्षणों के होने पर टीबी की जांच की जाती है। पहले से दवा खाए मरीजों के बलगम की सीबी नट से जांच की जाती है। इस जांच से एम टीबी, आरआर, एमडीआर का पता चलता है। जिससे मरीजों के इलाज में सहूलियत होती है। टीबी शरीर के कई हिस्सों में हो सकता है। जैसे छाती, फेफड़ों, गर्दन, पेट आदि। टीबी का सही समय पर जांच होना बहुत ही आवश्यक होता है। तभी हम इस गंभीर बीमारी से बच सकते हैं । 

प्राइवेट डॉक्टरों का सहयोग भी अनिवार्य
संचारी रोग पदाधिकारी (यक्ष्मा) डॉ रंजीत रॉय ने बताया कि टीबी उन्मूलन में प्राइवेट डॉक्टरों का सहयोग अनिवार्य है। निजी चिकित्सकों के साथ संपर्क कर प्राइवेट सेक्टर के इलाजरत टीबी रोगियों का नोटिफिकेशन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन में प्राइवेट डॉक्टर भी मरीजों को इलाज के साथ उनके कोर्स को पूर्ण करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने बताया कि दो हफ्तों से ज्यादा की खांसी, खांसी में खून का आना, सीने में दर्द, बुखार, वजन कम होने की शिकायत हो तो तत्काल बलगम की जांच कराएँ । जांच व उपचार बिल्कुल मुफ्त है। 

निक्षय पोषण योजना बनी मददगार 
टीबी मरीजों को इलाज के दौरान पोषण के लिए 500 रुपये प्रतिमाह दिए जाने वाली निक्षय पोषण योजना बड़ी मददगार साबित हुई है। नए मरीज मिलने के बाद उन्हें 500 रुपये प्रति माह सरकारी सहायता भी प्रदान की जा रही है। यह 500 रुपये पोषण युक्त भोजन के लिए दिया जा रहा है। टीबी मरीज को आठ महीने तक दवा चलती है। इस आठ महीने की अवधि तक प्रतिमाह पांच 500-500 रुपये दिए जाएंगे। योजना के तहत राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।

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