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इंदल ने दवाओं के नियमित सेवन से टीबी जैसी गंभीर बीमारी को दी मात

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प्रिंस कुमार 

- स्वास्थ्य विभाग ने इंदल को टीबी चैंपियन से सम्मानित किया
शिवहर, 6 फरवरी|
कहते हैं अगर सोच सकारात्मक हो तो आप बड़ी से बड़ी बाधा को पार करने में सफल हो सकते हैं।  ऐसा ही कुछ देखने को मिला जिले के तरियानी छपरा गांव में, जहां इंदल मुखिया ने टीबी जैसी गंभीर बीमारी को मात देने में सफलता हासिल की है। कभी ये खुद टीबी से ग्रसित थे और निराश थे। उन्हें एमडीआर टीबी थी। फिर सदर अस्पताल जाकर नियमित रूप से सरकारी दवाएं लेने लगे। 26 महीने बाद जांच में उन्हें टीबी मुक्त घोषित कर दिया गया। वे चाहते हैं कि टीबी की गिरफ्त में आए दूसरे लोग भी इससे निजात पाएं। इसके लिए वह दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक कर रहे हैं।

ऐसे चला बीमारी का पता
इंदल बताते हैं कि शुरूआत में सब ठीक था, लेकिन एक दिन अचानक खांसते समय उनके मुंह से खून आ गया। परिजन  तुरंत उन्हें अस्पताल ले गए। कई टेस्ट के बाद पता चला कि उनको टीबी हो गया है। इस जानकारी से परिवार का हर सदस्य सन्न रह गया। हालांकि, इंदल ने ये जानने के बाद भी उम्मीद नहीं छोड़ी। लगातार पॉजिटिव सोच की वजह से उन्हें इस बीमारी से लड़ने में ताकत मिली।

26 महीने में टीबी को दी मात

इंदल के मुताबिक, तय समय पर दवा लेने और स्वास्थ्य संबंधी डॉक्टरों के दिशा-निर्देशों का पालन पूरी तरह से  किया। जिसकी बदौलत उन्होंने 26 महीने के अंदर ही टीबी पर जीत दर्ज कर ली। टीबी का पता चला तो उन्होंने निजी अस्पताल की जगह सरकारी अस्पताल में इलाज कराया।

स्वास्थ्य विभाग ने घोषित किया टीबी चैंपियन
इंदल ने बताया कि उन्हें इस बीमारी से उबरने में डॉक्टरों के साथ-साथ परिवार और स्थानीय लोगों का भी पूरा सहयोग मिला। अब टीबी से पूरी तरह ठीक होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उनको खास सम्मान भी दिया। विभाग ने इंदल को टीबी चैंपियन घोषित किया है। वह अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए अब दूसरे लोगों को भी इस बीमारी के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

लक्षण वाले व्यक्ति रोग को छिपाएं नहीं
टीबी से डरने की नहीं बल्कि लड़ने की जरूरत है। सामुदायिक भागीदारी से ही 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का सपना साकार होगा। इसमें हर व्यक्ति को सहयोगी बनना होगा। जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. जियाउद्दीन जावेद ने अपील की है कि यदि टीम के लोग किसी के घर पहुंचे तो टीबी के लक्षण वाले व्यक्ति अपने रोग को छिपाएं नहीं, बल्कि लक्षणों के बारे में खुलकर बताएं। टीबी रोग की पुष्टि होने पर उनका समुचित इलाज होगा। उन्होंने बताया कि टीबी रोग पाए जाने पर रोगियों को मुफ्त दवाएं देने के साथ ही प्रतिमाह पांच सौ रुपये पोषण राशि देने का भी प्रावधान है। 
शिवहर को टीबी मुक्त बनाने में सामूहिक सहयोग करें
जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. जियाउद्दीन जावेद ने बताया कि शिवहर जिला को टीबी से पूर्णत: मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग कृत-संकल्पित है। इसमें समाज के सभी जागरूक प्रबुद्ध वर्ग, सभी अस्पताल एवं चिकित्सकों एवं निजी अस्पतालों की भूमिका निभाने की आवश्यकता है।

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