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सेविकाओं को कुपोषण से बचाव की जानकारी दी गई

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- एईएस/जेई से बचाव के लिए भी बैठक में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई 

प्रिंस कुमार 

मोतिहारी, 17 मार्च | जच्चा- बच्चा मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से पूर्वी चंपारण के मोतिहारी गौरीशंकर स्कूल में बुधवार को आंगनबाड़ी सेविका, सहायिकाओं की बैठक आयोजित की गई। जिसमें आईसीडीएस पर्यवेक्षिका राजेश्वरी देवी, एनएनएम ब्लॉक प्रोजेक्ट सहायक रूपम वर्मा, यूनिसेफ की बीएमसी दीक्षा कुमारी ने कुपोषण से बचने एवं मृत्यु दर में कमी के लिए आवश्यक दिशा- निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि देश में हजारों बच्चे व गर्भवती महिलाओं की मौत कुपोषण की वजह से हो रही है। इसलिए पोषण के महत्व को व्यापक पैमाने पर प्रचारित करने की आवश्यकता है। महिलाओं और बच्चों को संतुलित मात्रा में भोजन में पोषक तत्व प्राप्त हो इसके लिए घर के मुखिया को समझाएं । ताकि लोग संतुलित भोजन के महत्व को जान सकें और समाज से कुपोषण के दुष्प्रभाव को कम किया जा सके।

एईएस/जेई से बचाव के लिए भी दी गई जानकारी
आंगनबाड़ी, सेविकाएँ, सहायिकाओं को 
एईएस/जेई से बचाव के लिए भी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। पर्यवेक्षिका राजेश्वरी देवी, रूपम वर्मा, दीक्षा कुमारी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में हर घर जाकर चमकी के संदेशों को बताएं। नजर भी रखें कि बच्चों में चमकी के लक्षण आने पर तुरंत ही उसे नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर जाएं। डीसीएम नन्दन झा ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यक्रम और जागरूकता की सफलता आप सभी पर ही निर्भर है।


जन जागरूकता से चुनौती का मुकाबला संभव
केयर के मनीष भारद्वाज, ब्लॉक मैनेजर रजनीश पांडेय ने मस्तिष्क ज्वर (चमकी बुखार) के लक्षण, प्राथमिक उपचार तथा बचाव के उपाय पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाकर इस गंभीर बीमारी की चुनौती का मुकाबला किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि रात मे बच्चे को भूखे पेट न सोने दें , धूप में न जाने दें। बगीचे से कच्चे या जूठे फल न खाने दें । चमकी बुखार के लक्षण जैसे एकाएक बुखार, चमकी या ऐंठन आना , सुस्ती या बेहोशी मानसिक असंतुलन दिखने पर नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर लेकर जाएं। 


अंधविश्वास के चक्कर में न पड़ें  
डॉ यादव ने कहा कि कहीं-कहीं अंधविश्वास के चक्कर में लोग चमकी आने पर ओझा या झाड़फूंक वाले के पास अपना समय तो बर्बाद करते ही हैं साथ ही बच्चे का जीवन भी संकट में दल देते । ऐसा करना किसी भी हालत में जानलेवा हो सकता है। चमकी का इलाज सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। मौके पर आईसीडीएस पर्यवेक्षिका राजेश्वरी देवी, एनएनएम ब्लॉक प्रोजेक्ट सहायक रूपम वर्मा, यूनिसेफ की बीएमसी दीक्षा कुमारी, सेविका संघ की अध्यक्ष सीमा कुमारी, नजमा खातून, रिंकी देवी, पूनम देवी, शुषमा देवी, निकिता देवी, नामिता कुमारी,अंजना देवी, ज्योति देवी, सोनी देवी सहित कई उपस्थित थे।

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