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कालाजार को लेकर शिवहर जिला सजग

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प्रिंस कुमार 


- कालाजार से शिवहर को मुक्त कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कसी
- सभी पांच प्रखंडों में कालाजार उन्मूलन के लिए सिथेटिक पैराथायराइड का छिड़काव शुरू

प्रिंस कुमार 

शिवहर ,5 मार्च | कालाजार रोग से शिवहर जिला को मुक्त कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। स्वास्थ्य विभाग इस रोग से समाज को सुरक्षित रखने के लिए त्वरित गति से उन्मूलन कार्यक्रम चला रहा है। कोरोना से बचाव की व्यवस्था के बीच कालाजार के खिलाफ अभियान शुरू हो गया है। जिले के सभी पांच प्रखंडों में शुक्रवार से कालाजार उन्मूलन के लिए सिथेटिक पैराथायराइड का छिड़काव शुरू कर दिया गया है। छिड़काव कर्मियों की टीम जिले के विभिन्न गांवों में पहुंचकर सिथेटिक पैराथायराइड का छिड़काव कर रही है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. कामेश्वर कुमार सिंह ने बताया कि, कालाजार से बचाव के लिए एसपी पाउडर का छिड़काव पांच प्रखंड के 39 गांव में 66 दिनों तक किया जाएगा। इसके लिए एसडब्ल्यूएफ को प्रशिक्षित किया गया है। एसडब्ल्यूएफ सभी कार्यों के पर्यवेक्षण समेत छिड़काव किए गए घरों में जरूरी सुझाव भी दे रहे हैं।

मास्क तथा ग्लब्स भी उपलब्ध कराया गया
डॉ सिंह ने बताया कि, कोरोना के मद्देनजर छिड़काव कर्मियों को पीपीई किट उपलब्ध कराया गया है। विभाग की तरफ से उन्हें मास्क तथा ग्लब्स भी उपलब्ध कराया गया है। छिड़काव में लगे सभी दलों को दो गज की शारीरिक दूरी का पालन का निर्देश दिया गया है। 

कालाजार समाज के लिए काली स्याह की तरह
डॉ कामेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि कालाजार समाज के लिए काली स्याह की तरह है। इस बीमारी को जन-जागरूकता व सामूहिक सहभागिता से ही हराया जा सकता है। कालाजार तीन तरह के होते हैं, जिसमें वीएल कालाजार, वीएल प्लस एचआईवी और पीकेडीएल है।

बालू मक्खी काटने से फैलता है रोग
कालाजार रोग लिशमेनिया डोनी नामक रोगाणु के कारण होता है। जो बालू मक्खी काटने से फैलता है। साथ ही यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी प्रवेश कर जाता है। दो सप्ताह से अधिक बुखार व अन्य विपरीत लक्षण शरीर में महसूस होने पर अविलंब जांच कराना अति आवश्यक है। कालाजार की मक्खी नमी व अंधरे वाले स्थान पर ज्यादा फैलती है। एक को काटने के बाद दूसरे लोगों को भी काट लेती है।

तीन तरह के होते हैं कालाजार
कालाजार तीन तरह के होते हैं। जो वीएल कालाजार, वीएल प्लस एचआईवी और पीकेडीएल हैं। कालाजार रोग लिशमेनिया डोनी नामक रोगाणु के कारण होता है। जो बालू मक्खी काटने से फैलता है। साथ ही यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी प्रवेश कर जाता है। दो सप्ताह से अधिक बुखार व अन्य विपरीत लक्षण शरीर में महसूस होने पर अविलंब जांच कराना अति आवश्यक है। कालाजार की मक्खी, नमी व अंधरे वाले स्थान पर ज्यादा फैलती है। एक को काटने के बाद दूसरे लोगों को भी काट लेती है।

यह हैं कालाजार के लक्षण
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. कामेश्वर कुमार सिंह ने बताया रुक-रुक कर बुखार आना, भूख कम लगना, शरीर में पीलापन और वजन घटना, तिल्ली और लिवर का आकार बढ़ना, त्वचा-सूखी, पतली और होना और बाल झड़ना कालाजार के मुख्य लक्षण हैं। इससे पीड़ित होने पर शरीर में तेजी से खून की कमी होने लगती है।

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