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बच्चों को दी जायेगी एल्बेंडाजोल की गोली- पेट के कृमि से मुक्ति के लिए दवा जरूरी

प्रिंस कुमार 

मोतिहारी, 5 मार्च | बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत तभी बनाया जा सकता है, जब उनके शरीर में किसी बैक्टीरिया या किटाणुओं का संक्रमण न हो। कृमि होने पर बच्चों को कितना भी सन्तुलित आहार दें , वह मानसिक और शारीरिक तौर पर स्वस्थ नहीं रह सकता। कुपोषण से मुक्त बनाने तथा रक्त की कमी की समस्या को दूर करने के लिए बच्चों को पेट में कीड़ा मारने की दवा खिलाना जरूरी है। सिविल सर्जन डॉ अखिलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलायी जायेगी। यह दवा खाली पेट में नहीं दी जाती है। उन्होंने बताया कि एक से दो साल तक के बच्चों को आधा टैबलेट व उससे अधिक उम्र के बच्चों को एक टैबलेट देना है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि बच्चों में कृमि संक्रमण गंदगी तथा दूषित मिट्टी के संपर्क में आने से होती है। कृमि संक्रमण से बच्चों के पोषण स्तर तथा हीमोग्लोबिन स्तर पर दुष्प्रभाव पड़ता है। जिससे बच्चों में शारीरिक व बौद्धिक विकास प्रभावित होता है।

दवा खिलाते समय बरतनी होगी सावधानी
सिविल सर्जन डॉ अखिलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि बच्चों को दवा खिलाते समय सावधानी भी बरतनी होगी। जैसे कि अगर किसी बच्चे की बीमारी की वजह से इलाज चल रहा तो उसे दवा नहीं देनी है। किसी बच्चा को सर्दी, खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ आदि है तो उसे यह दवा नहीं खिलाई जाएगी। साथ ही बच्चा अगर कोविड-19 ग्रसित व्यक्ति के संपर्क में आया है तो इसकी भी पुष्टि करनी होगी। दवा नुकसान नहीं करेगी, लेकिन सावधानी के लिए ऐसे बच्चों को दवा नहीं दी जाएगी। एक से दो वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली को चूरा बनाकर पानी के साथ देना है।

दवा लेने पर घबराने की जरूरत नहीं
जिला प्रतिरक्षण प्रतीक्षण पदाधिकारी डॉ शरद चन्द्र श्रीवास्तव ने बताया दवा खिलाते समय यह ध्यान रखा जाये कि बच्चा दवा को चबाकर खाए । जिन बच्चों के पेट में कीड़ा अधिक होगा, उसे दवा खाने पर मामूली लक्षण सामने आयेंगे । इससे घबराने की जरूरत नहीं है। जैसे दवा खाने के बाद जी मचलाना, पेट में हल्का दर्द, उल्टी, दस्त और थकान महसूस होना। पेट में कीड़ा होने के कारण यह प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देगा। इस दौरान बच्चों को आराम की सलाह दें तथा उसे लेट जाने को कहें हे, 10 मिनट में समस्या स्वयं ही दूर हो जाएगी। 

कृमि संक्रमण के लक्षण
-कृमि संक्रमण पनपने से बच्चे कुपोषित हो जाते हैं ।
-बच्चों के शरीर में खून की कमी हो जाती है।
-बच्चे हमेशा थकान महसूस करते हैं 
-बच्चों की शारीरिक व मानसिक विकास भी बाधित हो जाती है।
-बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता की भी कमी हो जाती है।

कृमि संक्रमण से बचाव के उपाय
-नाखून साफ और छोटे रखें, 
-हमेश साफ और स्वच्छ पानी ही पीयें ,
-खाने को ढक कर रखें
-साफ पानी में फल व सब्जियां धोएं
-अपने हाथ साबुन से धोए विशेषकर खाने से पहले और शौच जाने क के बाद
-घरों के आसपास साफ-सफाई रखें
-खुले में शौच न करें करे हमेशा शौचालय का प्रयोग करें

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