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हर तीन में से एक महिला मानसिक रोग से ग्रसित : डॉ निवेदिता

- हर मानसिक बीमारी के लिए दवाई की जरूरत नहीं 
- 13 प्रतिशत महिलाएं बच्चे को जन्म देने के बाद होती हैं डिप्रेशन की शिकार

प्रिंस कुमार 

 सीतामढ़ी, 4 मार्च 
8 मार्च को विश्व सहित हमारे देश में भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा। महिलाओं के बचपन से लेकर उनके मां बनने तक के सफर में कई तरह के बदलाव आते हैं। कई मौकों पर वह परिवार की मुख्य कड़ी में भी शामिल होती हैं, पर शायद यह कम लोगों को पता होगा कि हर तीन में एक महिला मानसिक अवसाद से गुजर रही होती हैं। जिसे कुछ तो सकारात्मक ढंग से अपनाती हैं तो कुछ इसे स्वीकार नहीं कर पाती। अपोलो हॉस्पिटल में क्लीनीकल साइक्लोजिस्ट डॉ निवेदिता कहती हैं कि वैसे तो मानसिक स्वास्थ्य की समस्या किसी भी लिंग और वर्ग को हो सकती है लेकिन महिलाओं में यह समस्या कुछ अधिक ही देखी जाती है। 

41.9 प्रतिशत महिलाएं मानसिक बीमारी की जद में
डॉ निवेदिता कहती हैं डब्ल्यूएचओ के एक शोध के अनुसार 41.9 प्रतिशत महिलाएं मानसिक बीमारी से ग्रसित हैं। वहीं पुरुषों का प्रतिशत 29.3 है। अपने देश में स्वास्थ्य को लेकर डर, भय, शर्म और समाज को लेकर दिक्कतें आती हैं। हारमोनल परिवर्तन के कारण दिक्कतें होती हैं जैसे कि पीरियड्स में ज्यादा दर्द के कारण चिड़चिड़ापन और चिंता का बढ़ना। डब्ल्यूएचओ की ही एक अन्य शोध के मुताबिक 10 प्रतिशत गर्भवती (प्रेग्नेंट) महिलाएं एवं 13 प्रतिशत महिलाएं बच्चे को जन्म देने के बाद डिप्रेशन की शिकार होती हैं। वे अपने जीवन में आने वाले परिवर्तन और हारमोनल परिवर्तन को स्वीकार नहीं कर पाती। दोहरी चुनौती, घरेलू हिंसा, भेदभाव का सामना करते हुए कई महिलाएं अपने लिए समय नहीं निकाल पाती। आज समय से पहले मोटापा, मोनोपॉज और मोटापा भी मानसिक बीमारियों के ही कारण हो रहे हैं। 
 सभी जिला अस्पताल एवं पीएचसी पर मौजूद है मानसिक आरोग्यशाला
डॉ निवेदिता कहती हैं कि हर मानसिक बीमारी का इलाज दवाई ही नहीं है। कई बातों के लिए हमें दूसरों की मदद लेनी पड़ती है। जिस तरह अन्य स्वास्थ्य दिक्कतों के लिए हम डॉक्टर के पास जाते हैं ठीक उसी तरह मानसिक अवसाद की स्थिति में विशेषज्ञों से सलाह अनिवार्य रूप से लेनी चाहिए। इस संबंध में वैशाली जिला संचारी रोग पदाधिकारी सह सहायक एसीएमओ डॉ शिव कुमार रावत कहते हैं कि राज्य के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा जिला अस्पताल में मानसिक आरोग्यशाला एवं परामर्श केंद्र का गठन किया गया है। जहां महिलाएं परामर्शदात्री एवं विशेषज्ञों से अपनी बातों को रख सकती है और समस्या का निवारण भी करा सकती हैं। मानसिक आरोग्यशाला एवं परामर्श केंद्र तक ले जाने में अभिभावकों की महती भूमिका होती है।
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