अनुमंडलाधिकारी ने तमाम आवश्यक उपकरणों को अविलंब उपलब्ध कराने के दिये निर्देश - mithila Hindi news

mithila Hindi news

नई सोच नई उम्मीद नया रास्ता

क्रिकेट का लाइव स्कोर

अनुमंडलाधिकारी ने तमाम आवश्यक उपकरणों को अविलंब उपलब्ध कराने के दिये निर्देश

Share This

- अनुमंडलाधिकारी ने तमाम आवश्यक उपकरणों को अविलंब उपलब्ध कराने के दिये निर्देश 

प्रिंस कुमार 

एईएस/चमकी बुखार पर प्रभावी नियंत्रण के मद्देनजर चकिया के अनुमंडलाधिकारी ब्रजेश कुमार ने चकिया अनुमंडलीय अस्पताल के स्थितियों का जायजा लेते हुए मस्तिष्क ज्वर रोग के नियंत्रण हेतु तैयारियां आरम्भ कर दी है । अनुमंडलाधिकारी ने बताया मस्तिष्क ज्वर एक महामारी के रूप में मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण में साल के अप्रैल माह से जुलाई तक फैलता है । 95% केस इसी समय मिलते है । इस रोग से 6 माह की उम्र से 15 वर्ष तक के बच्चे प्रभावित होते हैं । इससे बचने के लिए प्रखंडों में पूर्व से ही जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है । जिसमें स्वास्थ्य कर्मियो के साथ, आशा, जीविका दीदियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का काफी योगदान हो रहा है । साथ ही अनुमंडलाधिकारी ने सभी डॉक्टरों को निर्देशित किया गया है कि अगर कोई भी अपने कार्य से अनुपस्थित पाए जाएंगे तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी । उन्होंने निर्देश दिया कि
 आईसीडीएस, जीविका एवं स्वास्थ्य विभाग के द्वारा अलग-अलग एईएस के प्रचार हेतु चौपाल किया जाए । जिसका पर्यवेक्षण केयर के द्वारा किया जाएगा एवं प्रतिदिन अधिहस्ताक्षरी को रिपोर्ट समर्पित किया जाएगा।
आवश्यक दवा एवम उपकरण तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश :

 चकिया अनुमंडलीय अस्पताल में कुल ए ई एस के 50 दवा में 37 एवं औजार 18 में 16 उपलब्ध हैं। बाकी का क्रय करने का आदेश दिया गया।
उन्होंने बताया चमकी में बहुत तेज बुखार आता है ।
 30 मिनट में अगर बच्चे का इलाज शुरू नहीं किया गया तो उसे बचाना भी मुश्किल हो जाता है। ज्यादा देर होने पर बच्चे के दिमाग में मस्तिष्क ज्वार फैलता है जिससे दिमागी और शारीरिक पैरालाइसिस का भी अटैक हो सकता है । जिससे उसकी मृत्यु हो सकती है। इस बीमारी में मृत्यु दर भी बहुत ज्यादा होता है । जिनको रोकने के लिये बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने अभी से ही बचाव हेतु अपनी तैयारियां जोर शोर से शुरू कर दी है ।
 स्वास्थ्य उपकरणों की लिस्ट तैयार कर अविलम्ब संसाधन उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने निर्देश दिये कि ए ई एस की जाँच अच्छी तरह की जाय एवम मरीज को किसी प्रकार की तकलीफ होने पर तुरन्त रेफर किया जाय । अस्पताल परिसर, ओ टी की पूरी साफ सफाई की जाय ।

 सर्वाधिक प्रभावित प्रखंडों मेहसी, चकिया समेत कई दलित/ महादलित बस्तियों में विगत वर्षों में एईएस/ चमकी की अधिक समस्या देखी गयी है ।वहाँ जागरूकता अभियान लगातार चलाया जाए । मामले की तुरन्त सूचना दी जाए। अनुमंडलाधिकारी ने कहा मुख्यमंत्री परिवहन योजना द्वारा चार- पांच गाड़ियां दी जा रही हैं। ताकि कोई भी बच्चा या बीमार छूट न पाए। उन्हें स्वास्थ्य केंद्र पर तुरंत पहुंचाया जा सके। यह सुविधा भी उन स्थलों पर दी गई है जहाँ अधिक खतरा है । अगर किसी भी मरीज के परिजन गाड़ी को प्राइवेट भाड़े कर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं तो उनके भाड़े की राशि उन्हें तुरंत मुहैया कराई जाए । मरीज के रहने खाने एवं ठहरने के लिए सरकारी अस्पताल द्वारा प्रबंध किए जाएं ।
 इस पर प्रभावी नियंत्रण के मद्देनजर विस्तृत कार्य योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा आने वाले दिनों में नुक्कड़ नाटक ,पोस्टर, पंपलेट, बैनर, हैंडविल, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,रेडियो एफएम इत्यादि के माध्यम से गांव और टोला स्तर पर जागरूकता का अलख जगाया जाएगा। उन्होंने कहा विभिन्न विभागों के परस्पर समन्वय से हम उम्मीद करते हैं कि गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी हम एईएस पर प्रभावी नियंत्रण करने में सक्षम हो सकेंगे।
 मौके पर अनुमंडलाधिकारी बृजेश कुमार,प्रखंड विकास पदाधिकारी अब्दुल कयूम,अंचलाधिकारी राजकिशोर साह, उपाधीक्षक- डॉ चंदन कुमार,डॉ बलराम चौधरी
डॉ सौरभ कुमार पांडेय,डॉ वरुण पटेल,सीडीपीओ श्रीमती अनुमेहा,
महिला पर्यवेक्षिका अम्बालिका कुमारी, स्मिता कुमारी, माधुरी कुमारी, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी- रामनाथ राम,जीविका बीपीएम विकास कुमार, प्रखंड प्रबंधक केअर- कुन्दन कुमार रौशन,प्रखंड स्वास्थ प्रबंधक- शशिकांत श्रीवास्तव,बीएमसी यूनिसेफ सुजीत कुमार दीपक सहित कई लोग उपस्थित थे ।

चमकी बुखार के लक्षण :

 - इसमे बच्चे को बहुत ही तेज बुखार होता है।
- जिसके बाद उसे चमकी आने शुरू हो जाती है।
- मुंह से झाग आता है ।
- बेहोशी की स्थिति हो जाती है।
- मरीज आदमी को वह पहचान भी नहीं पाता।

 चमकी से बचाव के उपाय:

- बच्चे को रात में बिना खाना खाए ना सोने दें।
- सोने से पहले रात के भोजन में मीठा वस्तु जरूर खिलाएं ।
- रात में तीन चार बार उसके शरीर की जांच करें कि बच्चा बेहोश तो नहीं 
 -ज्यादा बुखार होने पर उसे दवाई देते रहें एवं पट्टियां लगाते रहे ।
- सुबह उठकर भी माता-पिता अपने बच्चे को जगा कर उसकी स्थिति पर ध्यान दें।

No comments:

Post a comment

live

Post Bottom Ad

अगर आप विज्ञापन और न्यूज देना चाहते हैं तो वत्सआप करें अपना पोस्टर 8235651053

Pages