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एईएस/जेई से बचाव के लिए पूर्वी चम्पारण जिले में हो रहा है चौपाल का आयोजन

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- चौपालों से आई ग्रामीणों में जागरूकता , लोग अब हो रहें हैं चमकी के प्रति सतर्क 

प्रिंस कुमार 

मोतिहारी / 13 अप्रैल  
एईएस/जेई बुखार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पूर्वी चम्पारण के विभिन्न प्रखंडों चकिया, मेहसी, मधुबन , पताही , पकड़ीदयाल प्रखंडों में स्वास्थ्य कर्मियों, जीविका दीदियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं औऱ केयर कर्मियों के सहयोग से तैयारियां आरम्भ कर दी गयी है । राज्य सरकार के आदेशानुसार पूर्वी चम्पारण जिले के एईएस/जेई प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाकर स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लोगों को चमकी बुखार के बारे में सावधानी बरतने के उपाय बताने के निर्देश दिए गए हैं। 
अनुमंडलीय अस्पताल पकडी़दयाल के धनौजी पंचायत में वार्ड 06 में एईएस/ जेई चौपाल का आयोजन किया गया । जिसमें बाल विकास परियोजना पदाधिकारी रेखा कुमारी, ने बताया कि मस्तिष्क ज्वर एक भयानक महामारी के रूप में मुजफ्फरपुर, एवं पूर्वी चंपारण में साल के अप्रैल माह से जुलाई तक फैलता है । 95% केस इसी समय मिलते है । इस रोग से 6 माह की उम्र से 15 वर्ष तक के बच्चें प्रभावित होते हैं । चमकी से बचने के बच्चों को धूप से बचायें । साफ सफाई अपनाए । बच्चों को संतुलित आहार दे । रात में खाली पेट न सोने दें । उन्होंने बताया चमकी बुखार से बचने के लिए प्रखंडों में पूर्व से ही जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। जिसमें स्वास्थ्य कर्मियो के साथ, आशा, जीविका दीदियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता काफ़ी सहयोग कर रही हैं.  

सिविल सर्जन डॉ अखिलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि
पकड़ीदयाल अनुमंडलीय अस्पताल में एईएस के इलाज की व्यवस्था उपलब्ध करायी गयी है। साथ ही मरीजो को किसी भी प्रकार की तकलीफ न हो इसके लिए आवश्यक, संसाधनों, एवं दवाओं का ससमय क्रय करने का आदेश दिया गया है।
उन्होंने बताया कि चमकी में बहुत तेज बुखार आता है ।
30 मिनट में अगर बच्चे का इलाज शुरू नहीं किया गया तो उसे बचाना भी मुश्किल हो जाता है. ज्यादा देर होने पर बच्चे के दिमाग में मस्तिष्क ज्वार फैलाता है जिससे दिमागी और शारीरिक पैरालाइसिस का भी अटैक हो सकता है । जिससे उनकी मृत्यु तक हो सकती है. इस बीमारी में मृत्यु दर भी बहुत ज्यादा होता है । जिनको रोकने के लिये बिहार सरकार की स्वास्थ्य विभाग अभी से ही बचाव हेतु अपनी तैयारियां जोर शोर से शुरू कर दी है ।

पुर्वी चम्पारण के सिविल सर्जन डॉ अखिलेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा - मुख्यमंत्री परिवहन योजना द्वारा चार- पांच गाड़ियां दी जा रही है। ताकि कोई भी बच्चा या बीमार छूट न पाए. और उन्हें तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पर तुरंत पहुंचाया जा सके। यह सुविधा भी उन स्थलों पर दी गई है जहाँ अधिक खतरा है । अगर किसी भी मरीज के परिजन गाड़ी को प्राइवेट भाड़े कर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं तो उनके भाड़े की राशि उन्हें तुरंत मुहैया कराई जाए । मरीज के रहने खाने एवं ठहरने के लिए सरकारी अस्पतालद्वारा प्रबंध किए जाएं ।

केयर इण्डिया के डिस्ट्रिक्ट टीम लीड अभय कुमार ने बताया चमकी बुखार पर प्रभावी नियंत्रण के मद्देनजर विस्तृत कार्य योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा आने वाले दिनों में नुक्कड़ नाटक ,पोस्टर, पंपलेट, बैनर, हैंडविल, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,रेडियो एफएम इत्यादि के माध्यम से गांव और टोला स्तर पर जागरूकता का अलख जगाया जाएगा। उन्होंने कहा विभिन्न विभागों के परस्पर समन्वय से हम उम्मीद करते हैं कि गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी हम एईएसपर प्रभावी नियंत्रण करने में सक्षम हो सकेंगे।

जागरूकता ही सर्वप्रथम बचाव है :

केयर इंडिया के ब्लॉक मैनेजर सतीश कुमार सिंह ने कहा एईएस को लेकर समुचित जानकारी ही सर्वप्रथम बचाव है. चमकी बुखार के लक्षण, बचाव,सावधानियां, एवं एम्बुलेंस की सुविधा के बारे मे विस्तृत चर्चा की गयी. साथ ही चौपाल में शामिल हुए जनप्रतिनिधियों से भी अनुरोध किया गया कि वह अपने आसपास के बच्चों पर ध्यान दे । तथा चौपाल में मिली जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों मे फैलाएं. 

 आयोजित चौपाल के मौके पर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी रेखा कुमारी, प्रखण्ड स्वास्थ्य प्रबंधक अवनीश कुमार, प्रखण्ड सामुदायिक उत्प्रेरक अनिल मंडल, प्रखण्ड लेखापाल , अतुल कुमार श्रीवास्तव, महिला पर्यवेक्षिका सूश्री प्रिया, केयर इंडिया के प्रखण्ड प्रबंधक सतीश कुमार सिंह , जेडएलपीपी की फिमेल फैसिलिटेटर ऋचिका कुमारी और मेल फैसिलिटेटर सूरज कुमार, सीएचसी संजय कुमार, सेविका , सहायिका,आशा फैसिलिटेटर, आशा, विकास मित्र सरोज राम, जीविका से सीसी अमन कुमार सक्सेना, बृज मोहन एसी दिलीप कुमार मंडल लेखापाल अनिल ठाकुर, हरिचंद्र ठाकुर तथा सीएम और ग्रामीण समेत कई लोग चौपाल में उपस्थित थे ।

चमकी बुखार के लक्षण :

 - इसमे बच्चे को बहुत ही तेज बुखार होता है।
- जिसके बाद उसे चमकी आने शुरू हो जाती है।
- मुंह से झाग आता है ।
- बेहोशी की स्थिति हो जाती है।
- मरीज आदमी को वह पहचान भी नहीं पाता।

 चमकी से बचाव के उपाय:

- बच्चे को रात में बिना खाना खाए ना सोने दें।
- सोने से पहले रात के भोजन में मीठा वस्तु जरूर खिलाएं ।
- रात में तीन चार बार उसके शरीर की जांच करें कि बच्चा बेहोश तो नहीं 
 -ज्यादा बुखार होने पर उसे दवाई देते रहें एवं पट्टियां लगाते रहे ।
- सुबह उठकर भी माता-पिता अपने बच्चे को जगा कर उसकी स्थिति पर ध्यान दें।

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