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क्यों सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विकास वैभव का पत्रकार प्रेम कुमार को दिया गया श्रद्धांजलि वाला पोस्ट

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अनूप नारायण सिंह 

मिथिला हिन्दी न्यूज :- एक पत्रकार अपनी कलम की ताकत से समाज के हर वर्ग की लड़ाई लड़ता है जब वह जिंदगी की जंग हार जाता है तो उसके लिए दो शब्द भी उन लोगों के पास नहीं होता जो खुद को कभी उसके हिमायती बताते थे। पर हम आज आपको बता रहे हैं कि बिहार सरकार गृह विभाग में विशेष सचिव व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ने कल कोरोना के कारण दिवंगत हुए बिहार के युवा पत्रकार प्रेम कुमार को शब्दों के माध्यम से श्रद्धांजलि दी है उनका पोस्ट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है उन्होंने लिखा है कि किस तरह से प्रेम कुमार के काम करने की शैली ने उन्हें प्रभावित किया था आप भी सोचिए इंसान केवल पद व पावर से बड़ा हो सकता है पर जनप्रिय होने के लिए उसे विकास वैभव जी जैसा इंसान भी होना पड़ता है। आप भी पढ़े कि उन्होंने प्रेम कुमार के लिए क्या लिखा है........
#श्रद्धांजलि प्रेम कुमार जी, पत्रकार एवं प्रिय मित्र जिनसे 2006 में नगर पुलिस अधीक्षक, पटना (City SP, Patna) तथा 2015 में वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना (SSP, Patna) के दायित्व में प्रतिदिन पटना के अपराध के संदर्भ में बातें होती थीं और जिनसे स्नेहिल जुड़ाव सदैव बना रहा, कोरोना के कारण उनके दुःखद निधन की सूचना से अत्यंत मर्माहत हूँ । प्रेम जी अत्यंत सकारात्मक व्यक्तित्व के धनी थे तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने दायित्वों के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहते थे । प्रेम जी के साथ एक साक्षात्कार के क्रम को साझा करना चाहता हूँ जिसकी चर्चा हम आपस में सदैव करके हंसा करते थे । बात लगभग 15 वर्ष पूर्व में मई माह की ही है जब मैं नगर पुलिस अधीक्षक, पटना के दायित्व में अक्सर आश्चर्यचकित हुआ करता था कि पटना में घट रहे अपराधों की सूचना कई अवसरों पर मुझसे भी पहले ही पत्रकारों को कैसे प्राप्त हो जाती थी । इस रहस्य के विषय में जब अक्सर सोचता तो लगता कि निश्चित ही कोई ऐसे पत्रकार हैं जिनकी सूचना तंत्र पर बड़ी अद्भुत पकड़ है । 

एक दिन जब संध्या में पुलिस कार्यालय से गांधीमैदान में तब अवस्थित नगर पुलिस अधीक्षक, पटना के ऐतिहासिक आवास (1780 में निर्मित) की ओर बढ़ रहा था, तब अचानक मन में यह भावना जागृत हुई कि क्यों न पुलिस सूचना कक्ष (Police Information Room, जिसे पटना पुलिस PIR के रूप में जानती है तथा जहाँ से संपूर्ण पटना के वितंतु संवादों का प्रेषण नियंत्रण एवं प्रबंधन होता है) का औचक निरीक्षण कर लिया जाए । वाहन से उतरकर जैसे ही पुलिस सूचना कक्ष में प्रविष्ट हुआ सामने में प्रेम जी बैठे दिखे जो तन्मयता के साथ संवादों को सुन रहे थे और मेरे मन में चल रहे द्वंद्व का प्रत्यक्ष समाधान हो गया । इससे पूर्व कि प्रेम जी की दृष्टि मुझपर पड़ती, सभी बैठे पुलिसकर्मी मुझे देख चुके थे और अचानक अफरा-तफरी का वातावरण बन गया । तब प्रेम जी को देखकर मैं मुस्कराया और फिर उनके समक्ष ही सभी पुलिसकर्मियों को मैंने डांटते हुए बताया कि उनकी लापरवाही के कारण सूचनाओं की गोपनीयता किस प्रकार भंग हो रही है और भला कैसे पत्रकार पटना के सबसे महत्वपूर्ण सूचना कक्ष में बैठे दिख रहे थे । क्रोध से तमतमाया हुआ मैं सभी पुलिसकर्मियों पर अनुशासनिक कार्यवाही करने हेतु मन बनाकर वापस कार्यालय की ओर लौट गया । 

कार्यालय में बैठकर जब इस विषय पर मंथन कर रहा था कि किस प्रकार की कार्यवाही यथोचित है, उसी समय अचानक प्रेम जी मिलने आ गए । मैंने उन्हें बैठने के लिए कहा और यह बताते हुए कि सभी पुलिसकर्मियों पर गंभीर अनुशासनिक कार्यवाही होगी यह पूछा कि ऐसा कब से चल रहा था । तब उन्होंने मुझे समझाया कि मुझे आवेश में कभी निर्णय नहीं लेना चाहिए और यह जानने का सदैव प्रयास करना चाहिए कि यदि कोई समस्या हुई है तो भला व्यवस्था में चूक कहाँ और कैसे हुई है । वार्ता के क्रम में इस समस्या का कारण यह पता चला कि पुलिस सूचना कक्ष में प्रवेश संबंधी कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध ही नहीं थे । निर्देशों के अभाव में अनेक व्यक्तियों का आवागमन वहाँ होता रहता था जिसमें कई पत्रकार भी सम्मिलित थे । तब उनके कहने पर मुझे भी चूक कहाँ थी, यह बात समझ में आ गई और अनुशासनिक कार्यवाही नहीं करते हुए मैंने पुलिस सूचना कक्ष में प्रवेश संबंधी दिशा निर्देश बनाते हुए बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया । तत्पश्चात उसी संध्या तत्संबंधी आदेश पुलिस सूचना कक्ष के बाहर चिपका दिया गया । रहस्योद्घाटन के उपरांत प्रेम जी से विमर्श के कारण ही समस्या का वास्तविक समाधान संभव हो सका और तत्पश्चात पत्रकारों के पूर्व सभी प्रकार की सूचनाएं मुझे मिलने लगीं । हमारे प्रतिदिन मिलन एवं निरंतर वार्ता का क्रम उस साक्षात्कार के पश्चात और गतिमान हुआ और शनैः शनैः प्रेम जी के साथ एक अत्यंत स्नेहिल संबंध स्थापित होता चला गया जिसमें मैंने भी बहुत कुछ सीखा । आज उनके दुःखद निधन की सूचना से अत्यंत मर्माहत हूँ । 

प्रेम जी, आप स्मृतियों में सदैव स्थापित रहेंगे ! सर्वशक्तिमान से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति तथा परिजनों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य प्रदान करें ! विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ 🙏

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