पटना : ढाई साल के बच्चे को छोड़ गईं दिल्ली, खूब मेहनत कर पहली बार मे ही बन गई IAS अधिकारी - mithila Hindi news

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पटना : ढाई साल के बच्चे को छोड़ गईं दिल्ली, खूब मेहनत कर पहली बार मे ही बन गई IAS अधिकारी

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अनूप नारायण सिंह 

मिथिला हिन्दी न्यूज बिहार: शादी के पहले लड़कियां बहुत सारे ख़्वाब देखती हैं। वह अपने जीवन में कुछ ऐसा करना चाहती हैं जिससे उनकी एक अलग पहचान बन सके तथा वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके। परंतु अक्सर देखा जाता है एक लड़की शादी के बाद घर-परिवार और बच्चे को संभालते-संभालते अपनी पूरी जिंदगी गुजार देती है और अपने सपने भुला देती है। लेकिन कुछ ऐसी भी महिलायें हैं जो अपनी शादी के बाद भी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ सपने को पूरा कर रही हैं तथा समाज में अन्य लड़कियों के लिये भी नये-नये मिसाल कायम कर रही हैं।

आज की कहनी भी एक ऐसी लड़की की है जिसने अपने ढाई वर्ष के बच्चे और परिवार से दूर रहकर #UPSC की तैयारी की और 90वां रैंक हासिल कर पहले ही प्रयास में सफलता के शिखर को छु दिया। वह यह साबित करती है कि यदि मन में मंजिल को पाने की दृढ इच्छा-शक्ति हो तो दुनिया की कोई भी कठिनाई राह का रोड़ा नहीं बन सकती है।

अनुपमा सिंह (Anupama Singh) पटना (Patna) की रहनेवाली हैं। अनुपमा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना से ही पूरी की है। अनुपमा के पिता एक #रिटायर्ड #एमआर है तथा उनकी माता एक #आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है। वह बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में बेहद होशियार थी। वह 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद एमबीबीएस का प्रवेश परीक्षा दी और उसमे वह सफल हुई। इसके अलावा अनुपमा ने सबसे कठिन मानी जाने वाली MS की प्रवेश परीक्षा दिया और उसमे भी सफलता हासिल किया। उन्होंने वर्ष 2014 मे बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (#BHU) से मास्टर ऑफ़ सर्जरी (#MS) की उपाधि हासिल की। उसके बाद वह एक सरकारी #हॉस्पिटल में #एसआरसीप करने लगी। इस दौरान उनकी शादी हो गई। शादी के कुछ समय बाद ही उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया।

अनुपमा ने जब देखा कि सरकारी हॉस्पिटल में ग्राउंड लेवल पर बहुत सारी कमियां है तथा उसका हल नहीं निकल रहा है। तब उनके मन में विचार आया कि स्वास्थ्य प्रणाली में बदलाव की बहुत जरुरत है। वह एक डॉक्टर के तौर पर मरीजों का इलाज तो कर रही थी परंतु सिस्टम में मौजुद बहुत सारी समस्याओं पर कार्य नहीं कर पा रही थी। उन्होंने महसूस किया कि जब तक ये सभी समस्याएं खत्म नहीं होगी तो सिर्फ मरीजों के इलाज से उनका भला नहीं हो सकता है। इसी विचार के साथ उन्होंने सिविल सर्विस की ओर रुख किया।

अनुपमा ने जब देखा कि सरकारी हॉस्पिटल में ग्राउंड लेवल पर बहुत सारी कमियां है तथा उसका हल नहीं निकल रहा है। तब उनके मन में विचार आया कि स्वास्थ्य प्रणाली में बदलाव की बहुत जरुरत है। वह एक डॉक्टर के तौर पर मरीजों का इलाज तो कर रही थी परंतु सिस्टम में मौजुद बहुत सारी समस्याओं पर कार्य नहीं कर पा रही थी। उन्होंने महसूस किया कि जब तक ये सभी समस्याएं खत्म नहीं होगी तो सिर्फ मरीजों के इलाज से उनका भला नहीं हो सकता है। इसी विचार के साथ उन्होंने सिविल सर्विस की ओर रुख किया।

अनुपमा ने जब देखा कि सरकारी हॉस्पिटल में ग्राउंड लेवल पर बहुत सारी कमियां है तथा उसका हल नहीं निकल रहा है। तब उनके मन में विचार आया कि स्वास्थ्य प्रणाली में बदलाव की बहुत जरुरत है। वह एक डॉक्टर के तौर पर मरीजों का इलाज तो कर रही थी परंतु सिस्टम में मौजुद बहुत सारी समस्याओं पर कार्य नहीं कर पा रही थी। उन्होंने महसूस किया कि जब तक ये सभी समस्याएं खत्म नहीं होगी तो सिर्फ मरीजों के इलाज से उनका भला नहीं हो सकता है। इसी विचार के साथ उन्होंने सिविल सर्विस की ओर रुख किया।

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