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दीपों से जगमग हुआ कमला नदी का तट, कमला आरती में जुटे श्रद्धालु

पप्पू कुमार पूर्वे 
कमला आरती पूजा समिति जयनगर की ओर से पर्ण कुटी मंदिर जयनगर कमला तट पर कमला आरती व दीप महोत्सव कार्यक्रम आज सोमवार को मनाया गया। भक्तिमय भजनों पर श्रोता झूमने को मजबूर हो गए। बालक दास बाबा,की देखरेख में मां कमला का विविध पूजन अर्चना की गई। मंत्रोउच्चारण के साथ लोंगो ने मां कमला की आरती की, वही उपस्थित श्रद्धालुओं ने दीप जलाए। दीपकों से मां कमला का आंचल कई घंटों तक अलौकिक छटा बिखेरता रहा।बता दे पहली बार जयनगर में बनारस की तरह माँ कमला की आरती गंगा दशहरा के दिन इसकी शुरुआत जयनगर में की गई थी। कमिटी के सदस्यों का कहना है।यह आरती कार्यक्रम प्रत्येक सप्ताह में सोमवार के दिन किया जायेगा।आज यह कार्यक्रम का आठवाँ दिन था।समिति के सदस्यों ने लोगों के सुख-समृद्धि व सलामती के लिए कमला मैया से प्रार्थना की। इस दौरान कोरोना प्रोटोकाल का पालन किया गया।इस मौके पर कमला आरती पूजा समिति के अध्यक्षा रेखा महतो,दिलीफ़ महतो,बालक दास बाबा,नगर पंचायत के अध्यक्ष कैलाश पासवान,पंडित अरविंद तिवारी, राज कुमार सिंह, कालिकांत झा,रामदास हजरा,धीरेंद्र झा,रौशन चौधरी,अमित मांझी,राजेश गुप्ता ,बबलू राउत,दिनेश वर्मा सूर्य नारायण पूर्वे,मनोज सिंह,जगदीश चौधरी, उत्तमलाल सिंह, सूर्य नारायण शर्मा, विनय कुमार सिंह, रमेश झा,वीरेन्द्र यादव, मोहन राय, शकुंतला देवी, कामेश्वर विराजी, अनीता देवी, शोभा देवी, गंगा प्रसाद साह, बिन्दे सदाय, केवल चौधरी, राम भरोष महासेठ, रामबहादुर यादव, प्रकाश महासेठ, लीला देवी, संजय गुप्ता, धनंजय मिश्रा, विशेश्वर विराजी सहित अन्य मौजूद थे।मिथिलांचल के लोग कमला को छोटी गंगा भी कहते हैं। यह नदी नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों से बहकर जयनगर बॉर्डर होते बिहार में प्रवेश करती है। मिथिलांचल के 10 लाख से अधिक लोगों के लिए कमला जीवनदायिनी है। हर साल कमला में आने वाली बाढ़ उपजाऊ मिट्टी लेकर भी आती है। महापर्व छठ से लेकर विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान कमला तट पर होते है।

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