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आधुनिक युग के युगावतार थे भगवान अनुकूल

मानवता की रक्षा करने हर युग में आते हैं भगवान ।

मोरवा/संवाददाता। 

धरती पर जब जब मानवता त्राहिमाम करती है, तब तब अखिल मानवता की रक्षा के लिए भगवान युगावतार बनकर अवतार लेते हैं। उक्त बातें कहीं श्री ठाकुर श्री विग्रह मंदिर धर्मपुर बांदे परिसर में आयोजित युगपुरुषोत्तम ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के दो दिवसीय महा अमृत महोत्सव सत्संग समारोह को संबोधित करते हुए वरिष्ठतम ठाकुर भक्त डॉक्टर अशोक कुमार पांडे ने। डॉक्टर पांडे ने स्पष्ट करते हुए कहा जब संपूर्ण भारत अंग्रेजों की गुलामी से त्रस्त था। संपूर्ण अखंड भारत में अराजकता की स्थिति थी। उसी समय पवित्र भाद्रपद तालनवमी तिथि अट्ठारह सौ अट्ठासी ईसवी में माता मन मोहिनी एवं पिता शिवचंद्र चक्रवर्ती के घर में युगपुरुषोत्तम ठाकुर अनुकूल चंद्र जी का आविर्भाव हुआ। भगवान श्री कृष्ण की तरह जन्म के साथ ही उनके माता-पिता के विरोधियों के द्वारा बालक अनुकूल को मारने का षड्यंत्र शुरू हो गया। लेकिन भगवान के अवतार शिशु अनुकूल ने सभी हत्यारों को अत्यंत भयभीत करते हुए अपनी मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सभी हत्यारों को अपना दास बना लिया। भगवान श्री कृष्ण की तरह बाल लीला करते हुए बालक अनुकूल युवा हुए तब होम्योपैथिक की डिग्री लेकर मानवता की रक्षा के लिए सफल चिकित्सा शुरू कर दिया। लेकिन भगवान अनुकूल को मनुष्य के शरीर की चिकित्सा की बजाय इस युग के सभी मानव के मन और मस्तिष्क की चिकित्सा करनी थी। इसीलिए भगवान के नाम ध्यान की गहन साधना के बल पर युगातार अनुकूल ने महात्मा बुद्ध की तरह सैकड़ों अनंत नाथ एवं सैकड़ों किशोरी मोहन जैसे अंगुलिमालों को महात्मा अनंतनाथ और महात्मा किशोरी मोहन के रूप में परिवर्तित कर दिया। ठाकुर अनुकूल चंद्र द्वारा सर्वप्रथम लिखित लघु पुस्तक सत्यानुसारण को देखकर विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर इसके रचनाकार के संबंध में जब पूछा था। उन्हें बताया गया कि एक तेईस साल के युवा अनुकूल चंद्र चक्रवर्ती के द्वारा लिखा गया है। तब विश्वकवीन्द्र रवीन्द्र नाथ टैगोर ने आश्चर्यचकित होकर कहा था कि ऐसी सुंदर रचना कोई हजार साल का वयोवृद्ध ज्ञानी इंसान भी नहीं कर सकता है। महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु पुरुषोत्तम दास टंडन, देशबंधु बंगबंधु चितरंजन दास, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पिता श्री जानकीनाथ बोस, इत्यादि राजनीतिक लोगों ने ठाकुर अनुकूल चंद्र को अपना आराध्य बनाकर जीवन कृतार्थ किया। महात्मा गांधी ने ठाकुर अनुकूल चंद्र जी द्वारा बताए गए कुटीर एवं लघु उद्योग के द्वारा भारत की आर्थिक स्थिति को सुधारने के सिद्धांत को अपनाकर बुनियादी शिक्षा के रूप में संपूर्ण भारत में लागू करने का प्रयास किया था। महात्मा गांधी, प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री , जननायक कर्पूरी ठाकुर, भागवत झा आजाद, महेंद्र झा आजाद जैसे हजारों राजनीतिक पुरुषों ने ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के जीवनी सिद्धांतों को अपनाकर अपने जीवन को सार्थक किया। ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के जीवन और सिद्धांत से प्रभावित होकर बांग्लादेश के छः हजार से अधिक मुसलमान भाइयों ने अपना धर्म छोड़कर, हिंदू धर्म अपनाने को तैयार हो गए थे। ठाकुर अनुकूल चंद्र जी ने सभी धर्मों को एक समान बताते हुए, सर्वधर्म समभाव की स्थापना करते हुए मुसलमान और ईसाई बने रहने पर भी सच्चे इंसान रूप में जीवन जीने की प्रेरणा दी। इसीलिए आज संपूर्ण विश्व में ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के हिंदू, मुसलमान ,सिख , ईसाई सभी जाति धर्म के करोड़ों शिष्य उनके जीवन और सिद्धांतों को अपनाकर आदर्श पुरुष का जीवन जी रहे हैं।डॉक्टर पांडे ने स्पष्ट किया कि ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के द्वारा बताए गए यजन, याजन , और इष्टभृति के करने से मानव जीवन की अकाल मृत्यु समाप्त हो जाती है। ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के द्वारा प्रदत्त सुविवाह, सुप्रजनन, सदाचार एवं स्वसत्यैनी को जीवन में उतारने से आज भी सारा समाज सुख समृद्धि से संपन्न एवं सारी धरती स्वर्ग से सुंदर बन सकती है। वक्ताओं के द्वारा ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।समारोह को ऋत्विक द्रव्येश्वर ठाकुर, पशुपति मिश्र,सतीकांत चौधरी, सत्येंद्र पांडे, अविनाश कुमार पांडे, डॉ गोपाल प्रसाद राय, मुकेश प्रसाद, गोपाल कुमार झा आदि ने संबोधित किया। बिहार, बंगाल, उड़ीसा, नेपाल सहित भारत के कोने कोने से सैकड़ों सत्संगी श्रद्धालु महाअमृत महोत्सव समारोह में भाग ले रहे हैं। संपूर्ण क्षेत्र जॉय राधे राधे , कृष्ण , कृष्ण ,गोविंद, गोविंद, बोलो रे से गुंजायमान हो रहा है।

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