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नीतीश की विपक्षी मुहिम के कई अनसुलझे 'पेंच' को प्रशांत किशोर ने गिनती कराया , लालू का भी लिया नाम

संवाद 


चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) केंद्र से लेकर बिहार की सियासत को लेकर निरंतर तीखे आक्रमण कर रहें हैं. वहीं, इन्होंने गुरुवार को सीएम नीतीश कुमार की विपक्षी बैठक पर निशाना साधा. उन्होंने बोला कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को बिहार की फिक्र करनी चाहिए. नीतीश कुमार का खुद का ठिकाना नहीं है, आज आरजेडी (RJD) पार्टी के बिहार में जीरो एमपी हैं वो पार्टी देश में प्रधानमंत्री तय कर रही है, जिस पार्टी का खुद का ठिकाना नहीं है वो देश की दूसरी पार्टियों को एकत्र  कर रही है. प्रशांत किशोर ने बोला कि नीतीश कुमार से ये पूछना चाहिए कि क्या ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) कांग्रेस (Congress) के साथ कार्य करने को तैयार है? क्या नीतीश कुमार और लालू टीएमसी को बिहार में एक भीसीट देने को तैयार हैं? आज क्या नीतीश कुमार हमसे ज्यादा ममता बनर्जी को जानते हैं? पश्चिम बंगाल में नीतीश कुमार को पूछता कौन है?प्रशांत किशोर ने बोला कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बिहार के सीएम नीतीश कुमार विपक्ष को इकट्ठा करने की प्रयास में लगे हुए हैं. 

इस सिलसिले में इस महीने की 12 तारीख को विपक्ष के बड़े नेताओं की पटना में बैठक होगी. 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी का भी इसको लेकर बयान सामने आया है जिसमें इन्होंने बोला कि नीतीश कुमार ने पटना में आयोजित होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में सम्मिलित होने के लिए कांग्रेस को भी निमंत्रण दिया है, जिसे पार्टी ने स्वीकार कर लिया है.चुनावी रणनीतिकार कई बार बोल चुके हैं कि आज नीतीश कुमार क्या कर रहे हैं? इस पर ज्यादा बोलने का कोई तात्पर्य नहीं है. आज से 5 वर्ष पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू वो इसी भूमिका में थे, जिस भूमिका में आज नीतीश कुमार आने का प्रयत्न कर रहे हैं. नीतीश कुमार पर ताना कसते हुए बोला कि आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू उस वक्त बहुमत की सरकार चल रहे थे, जबकि नीतीश कुमार तो 42 विधायक के साथ आज लंगड़ी सरकार चला रहे हैं. चंद्रबाबू नायडू उस दौर में पूरे देश का दौरा करके विपक्ष को इकट्ठा कर रहे थे. इसका परिणाम ये हुआ कि आंध्र प्रदेश में उनके सांसद घटकर तीन हो गए, सिर्फ 23 विधायक जीते और वह प्रदेश की सत्ता से ही बाहर हो गए.प्रशांत किशोर ने बोला कि आप मेरी बातों को लिखकर रख लीजिए. नीतीश कुमार का भी वही हाल होगा जो चंद्रबाबू नायडू का हुआ था. अगले चुनाव में मोदी, लालू, नीतीश, कांग्रेस में से किसी पर यकीन मत कीजिए. मैं बिहार की जनता से गुजारिश करता हूं कि आप इन पार्टियों के चक्कर में न पड़ कर अपनी सरकार यानी कि जनता का सरकार बनाइए, तभी जाकर आपका प्रगति होगा. बता दें कि बीते वर्ष 2 अक्टूबर से बिहार के भिन्न भिन्न जिलों में जन सुराज पदयात्रा पर प्रशांत किशोर निकले हुए हैं. अभी समस्तीपुर में स्वास्थ्य वजहों से उनकी पदयात्रा निलंबित है.

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