मुजफ्फरपुर,बिहार ( मिथिला हिन्दी न्यूज कार्यालय ) ।मीनापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बढ़ रहा लोगों का भरोसा ।
मुजफ्फरपुर जिले में महिलाएं अपने प्रसव संबंधी सवाल एएनएम से पूछ रही है। कमरों पर उनके विभाग के साफ और स्पष्ट नाम लिखे हैं। मरीजों की काफी हलचल भी है। हर कर्मी अपने- अपने काम में मुस्तैद दिख रहे हैं। चारो ओर स्वच्छता का भी ख्याल रखा गया है। यह दृश्य किसी निजी अस्पताल का नहीं बल्कि जिले के मीनापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की है। जो आज क्षेत्र सहित इलाके के स्वास्थ्य केंद्रों के लिए एक मिसाल बन चुका है। इस संबंध में यहां के प्रभारी डॉ. एके पांडेय उस वक़्त की बात याद दिलाते है जब यहां उनकी नई पदस्थापना हुई थी। बाढ़ का समय था । स्वास्थ्य केंद्र के चारों ओर पानी था। तभी एक महिला प्रसव कराने आयी। उन्होंने नाव पर एएनएम को बुला प्रसव करवाया। वह बताते हैं, किसी भी व्यवस्था को मजबूत करने में में काफी वक्त लगता है। मैंने यहाँ यहां 24 से 48 घंटे भी काम किया है। कम चिकित्सक के बावजूद यहां 24 घंटे चिकित्सकों की उपलब्धता है। यहां की सफलता आप इस आंकड़े से ही देख सकते है कि साल भर में यहां प्रसव पूर्ण देखभाल के जो 150 आकड़े आते थे वह अब यह यहां का मासिक आंकड़ा है।
चमकी बुखार से निपटने की रहती है हरदम तैयारी डॉ एके पांडेय कहते हैं कि मीनापुर ब्लॉक चमकी प्रभावित क्षेत्र में आता है। इस लिहाज से उन्होंने इससे निपटने के लिए अलग से एक वार्ड रखा है। जिसमें बीमारी में प्रयुक्त होने वाली दवा , ऑक्सिजन सिलेंडर,सक्शन मशीन के साथ एसी की भी व्यवस्था है। एईएस से निपटने के लिए भी अभी से ही जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए 344 साइट पर जाकर टीकाकरण के साथ लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है. प्रत्येक घर में जाकर चमकी बुखार के बारे में जागरूक करने का लक्ष्य है. पिछली बार भी जागरूकता फैलाने में केयर और मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा था।
प्रसव एवं जाँच की है बेहतर सुविधा
प्रभारी डॉ. ए के पांडेय कहते हैं कि यहां गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक की सारी सुविधा उपलब्ध है। महीने में यहां 200 से 300 तक प्रसव हो रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद एक भी मरीज को रेफर नहीं किया जाता। इस सामुदायिक केंद्र में सभी तरह की मेडिकल जाँच की सुविधा उपलब्ध है. सतह ही, सेमि ऑटो एनालाइजर मशीन और सेन्ट्रीफ्यूगल मशीन की भी सुविधा है। जो इसे और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से अलग करती है। इसके साथ यहां के दवा का स्टोर रूम में दवाओं के रख-रखाव में भी सावधानी रखी जाती है। यहां हर वक़्त कुल 74 तरह की दवाएं उपलब्ध रहती हैं।
बेहतर शिशु देखभाल की व्यवस्था:
इस केंद्र में प्री टर्म बेबी( 37 सप्ताह से पूर्व शिशु जन्म) , ठीक से स्तनपान नहीं करने वाले, जन्म के समय ही बच्चे को हुए पीलिया रोग , जन्म के समय नहीं रोने वाले बच्चों के लिए आधुनिक मशीन के साथ खुद से ऑक्सिजन तैयार करने वाले कंसेंट्रेटर मशीन भी है । इसके साथ ही यहां फोटोथेरेपी मशीन भी उपलब्ध है।
दिव्यांग मरीजों के लिए भी सुविधा:
इस चिकित्सालय में हर तरह की जरुरी नियमों का पालन किया गया है। जिससे मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो।यहां दिव्यांगों मरीजों के लिए रैंप भी बनाया गया है। ताकि उन्हें स्वास्थ्य केंद्र में आने जाने में असुविधा नहीं हो।
क्या कहते हैं सिविल सर्जन:
सिविल सर्जन डॉ शैलेश प्रसाद सिंह ने बताया मीनापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सच में एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। चमकी बुखार के समय भी जागरुकता में मीडिया, केयर और जीविका का अहम योगदान रहा है। खास कर वहां के प्रभारी डॉ एके पांडेय ने भी हमेशा आगे बढ़कर काम किया है। मीनापुर केंद्र की हर जरूरत का विशेष ख्याल रखा जाता है। जल्द ही यहां के पैरामेडिकल स्टाफ और चिकित्सकों की कमी दूर होगी। आसीफ़ रजा की रिपोर्टिंग को समस्तीपुर कार्यालय से राजेश कुमार वर्मा द्वारा सम्प्रेषित ।
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