मृत्यु भोज समाजिक कोढ़ है - बीएन चौवे

जग्रनाथ दास 

मिथिला हिन्दी न्यूज बलरामपुर/ कटिहार:- प्रेम यूथ फाउंडेशन की ओर से मृत्यु भोज रीति या कुरीति पर वेविनार का आयोजन किया गया ।वेविनार को संबोधित करते हुये पत्रकार जगन्नाथ दास ने कहा कि मृत्यु भोज समाजिक कोढ़ है इसे समाप्त करने का उचित समय है यह कोरोना काल । इन्होंने बताया कि महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है कि दुखी व्यक्ति के अन्न ग्रहण नही करना चाहिए इससे व्यक्ति कि आयु क्षीण और ऊर्जा नष्ट होती है । उन्होंने लोगो से अपील किया कि जिस तरह से सती प्रथा को समाप्त किया गया उसी प्रकार मृत्यु भोज को भी समाप्त करना होगा और यह बदलाव खुद से जरूरी है हमे संकल्प लेना होगा कि मृत्यु भोज का हिस्सा नही बनेंगे । मृत्यु भोज शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बन गया है जिसमे मध्यमवर्ग के लोग पीस रहे है । वहीं जदयू नेत्री प्रवक्ता प्रो सुहेली मेहता ने कही की नीतीश कुमार लगातार समाजिक मुद्दे पर काम कर रहे है शराब बंदी,दहेज प्रथा वाल विवाह के विरुद्ध जन आंदोलन खड़ा किये है मृत्यु भोज पर भी सरकार गम्भीर है और इसे बंद कराने को लेकर जन चेतना चलाया जायेगा ।आज पहली प्राथमिकता माता पिता की सेवा और उनकी सुरक्षा को लेकर होनी चाहिए उन्हें उचित और पौष्टिक आहार मिले स्वास्थ्य सुविधा मिले इसी से उनकी आत्मा सन्तुष्ट होगी न कि मृत्यु के वाद बारह गाँव का भोज कराकर या छाता छड़ी या फोल्डिंग देकर । आप परिवार जनों की स्मृति में कुछ करना ही चाहते है तो स्कूल,हॉस्पिटल्स, पुस्तकालय बनबा दे यह अधिक लाभकारी होगा । वहीं पत्रकार लक्ष्मीकांत ने बहुत ही सटीक उदाहरण देते हुये बताया कि एक महिला बकरी पालती थी और जब भी उसके घर मे कोई पूजा पाठ होता तो बह बकरी को टोकरी से ढक देती थी जब महिला की मृत्यु हो गई तो बच्चों ने इसे परम्परा के रूप में ले लिया और जब भी कोई पूजा पाठ हो तो बकरी ढकने लगा इसी तरह की परंपरा यह मृत्यु भोज है जो धूर्तो ने अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए नरक का भय और स्वर्ग का लोभ देकर मनमाने दान दक्षिणा बसूल रहा है यह सामाजिक बुराई के साथ आर्थिक बुराई भी है कई लोग मृत्यु भोज के कारण खेत बेच रहा है कर्ज में डूब जा रहे है । मृत्यु भोज आडंबर और अंधविश्वास से अधिक कुछ नही है । इसे बंद करने के लिए सभी लोगो को आगे आना होगा । वहीं राजद नेता श्यामनन्दन यादव ने कहा कि श्री कृष्ण ने बताया है कि जिसका आत्मा दुखी हो।
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