मिथिला हिन्दी न्यूज :- बिहार सरकार सभी जिलों को यह निर्देश देती है कि कोरोना महामारी में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए तीन माह के लिए अस्थाई नियुक्ति कर सकते हैं। जिलो के सिविल सर्जन इंटरव्यू के बाद इनकी नियुक्ति कर देते हैं। फिर शिकायत मिलती है कि सभी नियुक्ति में सीएस ने जमकर धांधली की है और पैसों की वसूली की है। जिसकी जांच की जाती है और आरोप सही पाते हुए डीएम सभी नियुक्तियों को रद्द कर देते हैं। लेकिन कहानी में फिर ट्विस्ट आता है। नियुक्ति रद्द करने के फरमान को 24 घंटे का समय भी पूरा नहीं होता है और फिर से उन्हें स्वास्थ्य केंदों में ज्वाइन करने के आदेश दे दिए जाते हैं।लेेकि अब नए महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है एक माह पूर्व जिले में कोविड से लड़ाई के लिए बहाल किए गए 780 कर्मियों की सेवा मंगलवार से समाप्त कर दी गई। राज्य स्वास्थ्य समिति के आदेश पर सिविल सर्जन ने इस आशय का पत्र जारी कर दिया। पीएचसी प्रभारियों को भेजे निर्देश में सिविल सर्जन ने कहा है कि मानव बल की बहाली को मुख्यालय ने रद्द कर दिया है।
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