स्कूलों में पढ़ाई हो रही है या नहीं इसकी सरकार को फिक्र नहीं है.
सरकार ने सिर्फ गांव-गांव में स्कूलों को खोल दिया है. जहां नए विद्यालय नहीं खोले हैं, वहां स्कूलों को उत्क्रमित कर दिया है. बिहार में पूरी शिक्षा बंदोबस्त नियोजित शिक्षकों और उत्क्रमित विद्यालयों के चक्कर में चल रहा है.अंत में प्रशांत किशोर ने बोला कि बिहार में सिर्फ स्कूली शिक्षा ही नहीं कॉलेज की शिक्षा का भी यही हाल है. जिन्हें लगता है कि बिहार में नियोजित शिक्षकों के वजह से शिक्षा बंदोबस्त बदहाल है, उन्हें कॉलेजों को भी देखना चाहिए. इन कॉलेजों को नियोजित शिक्षक तो नहीं चला रहे. कॉलेजों में तो पढ़ाई भी नहीं हो रही. स्कूलों में जहां खिचड़ी बंट रही है तो वहीं कॉलेजों में डिग्री बंट रही है.बता दें कि प्रशांत किशोर 237 दिनों से पदयात्रा कर रहे हैं. बिहार में 2500 किलोमीटर से भी अधिक का सफर तय कर गांव-गांव घूम रहे हैं. गुरुवार को वे सरायरंजन और उजियारपुर के 8 गांवों में गए. इस दौरान कुल 12 किलोमीटर तक का सफर तय किया. ग्रामीण जनता को मतदान की ताकत का एहसास दिलाया.
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