इसे भांप कर नीतीश कुमार ने विधायकों से अलग-अलग (वन-टू-वन) बात करना प्रारंभ कर दिया.
बीजेपी नेता ने बोला कि जेडीयू के विधायक-सांसद न राहुल गांधी को स्वीकार करेंगे, न तेजस्वी यादव को. पार्टी में भगदड़ की आशंका है. जेडीयू पर वजूद बचाने का ऐसा संकट पहले कभी नहीं था इसलिए नीतीश कुमार ने 13 वर्ष में कभी विधायकों को नहीं पूछा. आज वे हरेक से अलग से मिल रहे हैं. उन्होंने बोला कि जेडीयू यदि महागठबंधन में रहा तो टिकट बंटवारे में उसके हिस्से लोकसभा की 10 से ज्यादा सीटें नहीं आएंगी. कई सांसदों पर बेटिकट होने की तलवार लटकती रहेगी. यह भी विद्रोह का वजह बन सकता है.अंत में सुशील कुमार मोदी ने बोला कि सीएम नीतीश कुमार ने विधायकों से बिना पूछे बीजेपी से गठबंधन तोड़ा. लालू प्रसाद यादव से फिर हाथ मिलाया और बिहार में प्रगति की रफ्तार तोड़ी. इससे दल के भीतर असंतोष निरंतर बढ़ता रहा है. अब वन-टू-वन वार्तालाप से आग बुझने वाली नहीं है.
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