किसी भी पार्टी ने बिहार के बच्चों के भविष्य के बारे में नहीं सोचा.
सभी ने मंदिर-मस्जिद, जंगलराज का भय दिखाकर जनता का वोट ठग कर लिए हैं. अब वक्त आ गया है कि बिहार के लोग इन सब चीजों से ऊपर उठकर अपने बच्चों के शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर वोट करें.वहीं, लोकसभा चुनाव लड़ने के प्रश्न पर विधान पार्षद ने बोला कि सियासत में हूं तो निश्चित चुनाव लडूंगा. यह प्रश्न ही मायने नहीं रखता है. सारण, महाराजगंज या पटना से लडूं, यह तो विषय ही नहीं है. किस स्थिति में विधान पार्षद का चुनाव जीता था. यह सभी को पता है. विकल्पों की कमी नहीं है. सियासत में जो है वह तो चुनाव लड़ेगा. बिहार के बच्चों की भविष्य की जो बात करेगा उस विकल्प के साथ मैं खड़ा हूं.
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