बेगूसराय से फिर होगी कन्हैया की 'पॉलिटिकल रीलॉन्चिंग'? राहुल गांधी बना रहे प्लान


संवाद 

नई दिल्ली/बेगूसराय। लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनज़र कांग्रेस पार्टी बिहार में अपनी रणनीति को धार देने में जुट गई है। इस बार कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ यात्रा के बहाने बेगूसराय आ रहे हैं और इसी दौरान माना जा रहा है कि कन्हैया कुमार को एक बार फिर राजनीतिक तौर पर रीलॉन्च किया जाएगा।

पिछली बार औंधे मुंह गिरे थे कन्हैया

साल 2019 में कन्हैया कुमार ने सीपीआई के टिकट पर बेगूसराय से चुनाव लड़ा था। उस समय उन्हें काफी चर्चा मिली थी लेकिन भाजपा के गिरिराज सिंह के सामने बुरी तरह हार गए थे। कन्हैया को उस चुनाव में तीसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा, जबकि दूसरे नंबर पर आरजेडी के तनवीर हसन थे।

गिरिराज सिंह: 6.87 लाख वोट

तनवीर हसन (राजद): 2.97 लाख वोट

कन्हैया कुमार (सीपीआई): 2.69 लाख वोट


कांग्रेस की क्या रणनीति है?

2021 में कन्हैया कुमार कांग्रेस में शामिल हो गए, और तब से राहुल गांधी के करीबी नेताओं में शुमार हो चुके हैं। पार्टी उन्हें एक युवावादी, तेजतर्रार और हिंदी भाषी चेहरा बनाकर पेश करना चाहती है। राहुल गांधी का बेगूसराय दौरा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कांग्रेस कन्हैया को या तो बेगूसराय से उम्मीदवार बना सकती है या बिहार में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।

क्या है आगे की उम्मीद?

कांग्रेस को उम्मीद है कि अगर कन्हैया को सही मंच और गठबंधन का साथ मिला, तो वो बिहार में पार्टी को युवाओं के बीच पकड़ मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन बड़ी चुनौती यह है कि बेगूसराय जैसे कम्युनिस्ट-हिंदुत्व मिश्रित इलाके में क्या वे फिर से लोगों का भरोसा जीत पाएंगे?

कहने को तो कन्हैया के पास जज़्बा और जुबान दोनों है, लेकिन इस बार बेगूसराय का जनादेश कांग्रेस के साथ कितना जाता है – यही देखने लायक होगा।

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