संवाद
मैं यह आलेख पोस्ट करने ही वाला था कि इसी बीच टी20 वर्ल्ड कप क्रिकेट के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी गई। और जैसा अंदेशा था, बीसीसीआई के सेलेक्टर्स ईशान किशन को आखिरकार नज़रअंदाज़ नहीं कर सके। लंबे समय तक चली अटकलों के बाद चीफ सेलेक्टर अजित अगरकर को ईशान किशन को टीम में शामिल करना ही पड़ा।
मेरे आर्टिकल में पहले ही लिखा गया था कि गाज शुभमन गिल पर ही गिरने वाली है, और वही सच साबित हुआ।
बहरहाल, इस मौके पर ईशान किशन को दिल से बहुत-बहुत बधाई। इस मुक़ाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने जो तपस्या की, जो संघर्ष झेला और बार-बार खुद को साबित किया—वह काबिल-ए-तारीफ है।
दरअसल, कुछ समय पहले बीसीसीआई के चीफ सेलेक्टर अजित अगरकर ने ईशान किशन को खुली चुनौती दी थी—
“बेहतरीन खिलाड़ी हो, डोमेस्टिक क्रिकेट में रन बनाओ।”
ईशान ने इस चुनौती को न सिर्फ स्वीकार किया, बल्कि मैदान पर रनों की बाढ़ ला दी। रणजी ट्रॉफी में दमदार प्रदर्शन, विजय हजारे ट्रॉफी में शतक की चमक और सीमित ओवरों में छक्कों की मूसलाधार बरसात ने सेलेक्टर्स को सोचने पर मजबूर कर दिया।
टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर टीम चयन हमेशा बलिदान मांगता है। इस बार कुर्बानी शुभमन गिल की दी गई। गिल की क्लास और तकनीक पर कोई सवाल नहीं, लेकिन टी20 क्रिकेट की आग में ईशान किशन का विस्फोटक अंदाज़ उन्हें थोड़ा आगे खड़ा करता है। ओपनिंग में स्थिरता जरूरी है, लेकिन टी20 में मैच पलटने की क्षमता उससे भी बड़ी मांग बन जाती है।
आखिरकार चयन का वही नाटक देखने को मिला, जो क्रिकेट की सबसे बड़ी खूबसूरती है। ईशान किशन ने यह साबित कर दिया कि बाहर बैठकर भी खुद को शेर की तरह तैयार रखा जा सकता है। अब उम्मीद है कि वर्ल्ड कप में उनके लंबे-लंबे छक्के न सिर्फ स्टेडियम, बल्कि करोड़ों फैंस के दिल भी हिला देंगे।
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