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सवर्ण समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के हितों की रक्षा के लिए गठित राज्य आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। आयोग के अध्यक्ष महाचंद्र प्रसाद सिंह ने रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि सवर्ण युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों में कई प्रकार की व्यावहारिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें दूर करने के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठाना जरूरी है।
आयोग ने सरकारी नौकरियों में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के पुरुष अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु सीमा में बदलाव की स्पष्ट सिफारिश की है। वर्तमान में ईडब्ल्यूएस पुरुषों के लिए अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष निर्धारित है, जिसे बढ़ाकर 40 वर्ष करने का सुझाव दिया गया है। आयोग का कहना है कि अन्य आरक्षित वर्गों को आयु सीमा में छूट का लाभ मिलता है, जबकि ईडब्ल्यूएस पुरुष अभ्यर्थी इससे वंचित रह जाते हैं। चूंकि ईडब्ल्यूएस महिलाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा पहले से ही 40 वर्ष है, इसलिए समानता के आधार पर पुरुषों को भी यह सुविधा दी जानी चाहिए।
रिपोर्ट में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए एक विशेष ‘हॉस्टल मॉडल’ भी प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत राज्य के प्रत्येक जिले में सवर्ण ईडब्ल्यूएस छात्रों के लिए 100-100 बेड वाले छात्रावास बनाए जाने की सिफारिश की गई है। इन छात्रावासों में उन्हीं छात्रों को प्रवेश मिलेगा, जिन्होंने किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली हो।
आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि इन हॉस्टलों में मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन और कोचिंग की व्यवस्था की जाए। यदि कोई छात्र मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो पाता है, तो उसे दो वर्षों तक छात्रावास में रहकर कौशल विकास प्रशिक्षण लेने की अनुमति दी जाए, ताकि वह रोजगार के अन्य अवसरों के लिए खुद को तैयार कर सके।
आयोग का मानना है कि इन सिफारिशों को लागू करने से ईडब्ल्यूएस वर्ग के सवर्ण युवाओं को न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में समान अवसर मिलेंगे, बल्कि वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे। अब सरकार की ओर से इस रिपोर्ट पर निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
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