पटना। देसी और जर्सी गाय के साथ अब भैंस को भी डेयरी परिस्थितिकी तंत्र (ईकोसिस्टम) में शामिल करने को लेकर ब्लूप्रिंट में गंभीर चर्चा चल रही है। पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि भैंस आधारित डेयरी मॉडल किसानों और पशुपालकों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकता है।
बताया जा रहा है कि भैंस में किया गया निवेश बेहतर रिटर्न देता है। एक भैंस अपने जीवनकाल में औसतन 18 से 19 बच्चे देती है, जिससे पशुधन का तेजी से विस्तार संभव होता है। यही कारण है कि भैंस पालन को दीर्घकालीन और टिकाऊ आय का जरिया माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भैंस में एक रुपये के निवेश पर 50 से 60 रुपये तक मुनाफा कमाया जा सकता है। दूध की उच्च वसा मात्रा, बाजार में स्थिर मांग और उप-उत्पादों से होने वाली अतिरिक्त आमदनी भैंस पालन को और आकर्षक बनाती है।
यदि ब्लूप्रिंट के अनुसार नीतिगत समर्थन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ डेयरी सेक्टर में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।
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