संवाद
भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में संगठनात्मक मजबूती का स्पष्ट संकेत देते हुए दरभंगा शहरी क्षेत्र के विधायक और पूर्व मंत्री संजय सरावगी को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। पटना स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में जिस भव्य तरीके से उनकी ताजपोसी हुई, उसने साफ कर दिया कि पार्टी आने वाले वर्षों की सियासी रणनीति को अभी से धार दे रही है।
प्रदेश अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में पार्टी के सभी विधायक, एमएलसी, वरिष्ठ नेता, जिला अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान पटना की सड़कों पर कई घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही, जिससे आयोजन की विशालता और कार्यकर्ताओं के उत्साह का अंदाजा लगाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि कल पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बांकीपुर से विधायक नितिन नवीन के आगमन के साथ यह भीड़ और बढ़ सकती है, क्योंकि मामला राष्ट्रीय नेतृत्व से जुड़ा है।
दिलचस्प बात यह है कि संजय सरावगी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है जब न तो बिहार में विधानसभा चुनाव सामने हैं और न ही लोकसभा चुनाव का तत्काल दबाव। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में, बीजेपी के दो उपमुख्यमंत्रियों के सहयोग से एनडीए सरकार अगले पांच वर्षों के लिए लगभग स्थिर मानी जा रही है। खरमास के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना भी जताई जा रही है, जिसमें कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है।
जातीय समीकरण और बीजेपी की रणनीति
संजय सरावगी वैश्य समाज से आते हैं। इससे पहले भी बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष इसी समाज से रहे हैं, जबकि उनके पहले कुशवाहा समाज से आने वाले सम्राट चौधरी इस पद पर थे। इससे पहले डॉक्टर दिलीप जायसवाल भी वैश्य समाज से थे। यह सिलसिला बताता है कि बिहार बीजेपी संगठनात्मक नियुक्तियों में जातीय संतुलन को लेकर बेहद सतर्क और रणनीतिक है।
बिहार की राजनीति में वैश्य, भूमिहार, ब्राह्मण, कायस्थ, राजपूत, कुर्मी और कुशवाहा समाज का प्रभाव हमेशा से रहा है। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर राज्यसभा और एमएलसी के कोटे तक पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि बीजेपी ने पिछले तीन-चार वर्षों में बिहार की कास्ट पॉलिटिक्स को बखूबी साध लिया है और खुद को इस खेल में सबसे आगे खड़ा कर लिया है।
संजय सरावगी की ताजपोसी सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले समय में बिहार बीजेपी की सियासी दिशा और सामाजिक संतुलन को मजबूत करने का संकेत भी मानी जा रही है।
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