मकर संक्रांति 2026: लालू यादव की दही-चूड़ा परंपरा से निकलती है बिहार की राजनीति की दिशा

पटना।

मकर संक्रांति आते ही बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज की गूंज तेज हो जाती है। यह आयोजन अब सिर्फ पर्व का हिस्सा नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच बनने-बिगड़ने वाले समीकरणों का मौन संकेत भी बन चुका है। वर्षों से यह देखा जाता रहा है कि दही-चूड़ा की मेज पर हुई मुलाकातों के बाद राज्य की राजनीति में कोई न कोई नई करवट जरूर आती है।

संक्रांति के आसपास राजधानी पटना से लेकर जिलों तक करीब पखवाड़े भर सियासी दावतों का सिलसिला चलता है। कहीं गया के टिकारी क्षेत्र का गुड़ और तिलकुट सुर्खियों में रहता है, तो कहीं गंगा दियारा की मलाईदार दही और भागलपुर के कतरनी चावल से बने चूड़ा की खुशबू माहौल को खास बना देती है।

आम जनता से जुड़ने की पहल से बनी सियासी परंपरा

दही-चूड़ा भोज को राजनीतिक पहचान 1990 के दशक के मध्य में मिली, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने इसे जनता से सीधा जुड़ाव बनाने का माध्यम बनाया। संक्रांति पर अपने आवास पर विशेष भोज की शुरुआत उन्होंने की, जो देखते-देखते एक सशक्त राजनीतिक परंपरा बन गई।

इस आयोजन की खासियत यह रही कि एक दिन पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भोज होता था, जबकि अगले दिन आसपास की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब परिवारों को आमंत्रित कर स्वयं परोसा जाता था। इससे राजनीति और आम लोगों के बीच की दूरी कम करने का संदेश जाता था।

जब भोज के बाद बदला सत्ता का गणित

दही-चूड़ा भोज से जुड़ा एक बड़ा सियासी मोड़ वर्ष 2017 में देखने को मिला। उस समय महागठबंधन की सरकार चल रही थी और लंबे अंतराल के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राबड़ी देवी के आवास पर संक्रांति भोज में पहुंचे थे। सौहार्द और मुलाकातों के इस माहौल के कुछ ही महीनों बाद बिहार की राजनीति ने यू-टर्न लिया और सत्ता का गणित बदल गया।

जेल से भी नहीं टूटा भोज का रिश्ता

चारा घोटाले के मामलों में जेल में बंद रहने के दौरान भी लालू यादव का दही-चूड़ा भोज चर्चा में बना रहा। जमानत पर सुनवाई के दौरान अदालत में दिए गए उनके मजाकिया बयान ने यह साबित कर दिया कि यह भोज उनके लिए सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है।

आज भी मकर संक्रांति पर होने वाला दही-चूड़ा भोज बिहार की राजनीति में खास महत्व रखता है और हर साल यह सवाल छोड़ जाता है कि इस परंपरा के बाद इस बार बिहार की सियासत किस करवट बैठेगी।

देश, राजनीति और बिहार की हर बड़ी खबर के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.