संवाद
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बहुचर्चित मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, सांसद मीसा भारती, तेज प्रताप यादव, हेमा यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दे दिया है। अदालत के इस फैसले के साथ ही मामले में एक नया मोड़ आ गया है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि मामले में नामजद 52 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी किया जा रहा है। इससे पहले अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की ओर से लंबी दलीलें पेश की गई थीं, जिन पर विचार करने के बाद कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया।
क्या है मामला
यह मामला कथित तौर पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोपों से संबंधित है, जिसमें लालू परिवार और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय एजेंसियों की जांच के आधार पर आरोप तय करने की मांग की गई थी।
कोर्ट का रुख
कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेज़ों और प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर कुछ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के पर्याप्त आधार बनते हैं, इसलिए उनके विरुद्ध आरोप तय किए जाते हैं। वहीं, जिन 52 आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं पाए गए, उन्हें न्यायालय ने राहत देते हुए बरी कर दिया।
राजनीतिक हलचल तेज
अदालत के आदेश के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे कानून की जीत बताया है, जबकि राजद नेताओं ने कहा कि वे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा रखते हैं और आगे कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ेंगे।
मामले में अब आरोप तय होने के बाद आगे की सुनवाई और गवाहों की पेशी का रास्ता साफ हो गया है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
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