बिहार की पहचान रही उपजाऊ धरती अब धीरे-धीरे अपनी ताकत खोती नजर आ रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सैटेलाइट एप्लीकेशन सेंटर की नवीनतम रिपोर्ट ने राज्य की कृषि व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में 7.50 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की मिट्टी खराब हो चुकी है, जिससे कृषि उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
इसरो की रिपोर्ट में बताया गया है कि कोसी-सीमांचल और पूर्वी बिहार के लगभग सभी जिलों में मिट्टी की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। इन क्षेत्रों में मृदा क्षरण, जलभराव, बाढ़ के बाद बालू जमाव, रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग और जलवायु परिवर्तन जैसे कारणों से जमीन की उर्वरता लगातार घट रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते मृदा संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को नहीं अपनाया गया, तो आने वाले वर्षों में किसानों की पैदावार और आय दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। कोसी क्षेत्र में हर साल आने वाली बाढ़ भी मिट्टी की गुणवत्ता को तेजी से नुकसान पहुंचा रही है।
राज्य सरकार और कृषि विभाग के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि वे इसरो की रिपोर्ट को आधार बनाकर मिट्टी सुधार कार्यक्रम, जैविक खेती और जल प्रबंधन पर ठोस कदम उठाएं, ताकि बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बचाया जा सके।
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