अब तक गंगाजल के उपयोग के लिए केंद्र सरकार की ओर टकटकी लगाए रहने वाले बिहार के लिए बड़ी राहत की खबर है। पहली बार गंगा नदी के पानी में बिहार को आधिकारिक तौर पर हिस्सेदारी मिलने की संभावना बन रही है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार बिहार को लगभग 900 क्यूसेक गंगाजल के उपयोग की अनुमति दे सकती है।
यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो यह ऐतिहासिक होगा, क्योंकि अब तक गंगा नदी के पानी में बिहार का कोई निर्धारित कोटा नहीं रहा है। राज्य सरकार लंबे समय से गंगाजल के उपयोग को लेकर केंद्र से मांग करती आ रही है, खासकर पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए।
हालांकि बिहार सरकार ने गंगा नदी के पानी में कम-से-कम 2000 क्यूसेक हिस्सेदारी की मांग रखी थी, लेकिन फिलहाल 900 क्यूसेक पर सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शुरुआत भले ही अपेक्षा से कम हो, लेकिन इससे भविष्य में बिहार के लिए गंगाजल के अधिक उपयोग का रास्ता खुलेगा।
गंगाजल की हिस्सेदारी मिलने से खासकर गंगा किनारे बसे जिलों में पेयजल संकट दूर करने, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और औद्योगिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार इसे बिहार के जल प्रबंधन के लिहाज से एक अहम उपलब्धि मान रही है।
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