दो दशकों का फर्जीवाड़ा उजागर: बहन की पहचान पर शिक्षिका बनी रही, स्कूल में पढ़ाती रही ‘नकली प्रधान


संवाद 


शिक्षा के मंदिर में दो दशकों तक झूठ की नींव पर खड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा आखिरकार सामने आ गया है। पश्चिमी चंपारण जिले के भितहा प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर-1 में प्रधान शिक्षिका के पद पर कार्यरत कुमारी मुन्नी गुप्ता वर्षों से अपनी सगी छोटी बहन कुमारी अनीता गुप्ता की पहचान और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी कर रही थीं।

विभागीय रिकॉर्ड में खुद को ‘अनीता’ बताकर वेतन और पद का लाभ उठा रहीं मुन्नी गुप्ता का यह राज शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से उजागर हो गया। जांच के दौरान जब दस्तावेजों और वास्तविक पहचान का मिलान किया गया तो पूरा मामला सामने आया।

कैसे खुला फर्जीवाड़ा

सूत्रों के अनुसार, विद्यालय और शिक्षा विभाग को लंबे समय से शिक्षिका की पहचान को लेकर संदेह था। हाल ही में शिकायत के बाद जब प्रमाणपत्रों, आधार संबंधी विवरण और पारिवारिक रिकॉर्ड की जांच हुई, तो स्पष्ट हुआ कि नौकरी पर तैनात महिला वास्तव में मुन्नी गुप्ता हैं, जबकि दस्तावेज उनकी बहन अनीता गुप्ता के हैं।

बताया जा रहा है कि करीब 20 वर्षों से अधिक समय तक यह फर्जीवाड़ा चलता रहा और इस दौरान सरकारी खजाने को भी नुकसान पहुंचा।

विभागीय कार्रवाई की तैयारी

मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। संबंधित शिक्षिका के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और वेतन व अन्य लाभों की रिकवरी की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने के मामले में कानूनी कार्रवाई की भी संभावना जताई जा रही है।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि वर्षों तक एक ही विद्यालय में फर्जी पहचान के सहारे नौकरी कैसे चलती रही और विभागीय निगरानी क्यों नाकाम रही।

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