चार साल में भी नहीं मिली पूरी जानकारी, विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की भारी कमी


संवाद 

पिछले लगभग चार वर्षों से शिक्षा विभाग राज्य के विश्वविद्यालयों से कर्मचारियों की पदवार रिक्तियों का विवरण लगातार मांग रहा है, लेकिन अब तक विभाग को मात्र 1200 रिक्तियों की ही सूचना मिल सकी है। यह संख्या वास्तविक जरूरत के मुकाबले बेहद कम बताई जा रही है।

विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। परीक्षा संचालन, नामांकन, वेतन भुगतान, छात्रवृत्ति और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगातार देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई विवि ऐसे हैं जहां एक ही कर्मचारी को कई-कई जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रिक्तियों की सही जानकारी नहीं मिलने के कारण नई बहाली की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि संसाधनों की कमी और प्रशासनिक जटिलताओं के चलते विवरण भेजने में विलंब हो रहा है।

यदि जल्द ही पदवार रिक्तियों का पूरा ब्योरा नहीं मिला, तो विश्वविद्यालयों में कार्य व्यवस्था और अधिक चरमरा सकती है। इस स्थिति से सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ रहा है।

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