भूमि से जुड़े मामलों में जाली और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वालों के खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने कहा है कि ऐसे सभी मामलों में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत अनिवार्य रूप से प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई जाएगी।
सरकारी निर्देश के अनुसार, यदि किसी अंचल या राजस्व कार्यालय में भूमि से संबंधित किसी मामले में जाली दस्तावेज सामने आते हैं और उस पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है या मामले को दबाने का प्रयास किया जाता है, तो संबंधित अंचलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का मानना है कि भूमि विवादों में फर्जी कागजात की वजह से आम लोगों को लंबे समय तक परेशान होना पड़ता है। नए निर्देशों से न सिर्फ भूमि माफियाओं और दलालों पर लगाम लगेगी, बल्कि आम नागरिकों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होगा।
अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि भूमि अभिलेखों की जांच के दौरान यदि कोई संदेहास्पद दस्तावेज मिलता है, तो उसकी तत्काल जांच कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भूमि से जुड़े मामलों में अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस फैसले को बिहार में भूमि सुधार और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े पर प्रभावी नियंत्रण हो सकेगा।
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