बिहार का गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बीते कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय तस्करी के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरता नजर आ रहा है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। गया एयरपोर्ट से हाइड्रोपोनिक वीड (उन्नत किस्म का गांजा), सोना और भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बरामदगी इस ओर इशारा कर रही है कि तस्कर इसे एक ‘सेफ जोन’ के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, थाईलैंड और म्यांमार जैसे देशों से जुड़े नशा और सोना तस्करी नेटवर्क का दायरा अब बिहार तक फैल चुका है। खासकर बौद्ध सर्किट से जुड़े विदेशी यात्रियों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का लाभ उठाकर तस्कर गया एयरपोर्ट को अपने ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल के मामलों में पकड़ी गई खेपों ने यह साफ कर दिया है कि तस्करी संगठित और सुनियोजित तरीके से की जा रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि हाइड्रोपोनिक वीड जैसी महंगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा मांग वाली नशीली वस्तुओं की तस्करी केवल स्थानीय स्तर पर संभव नहीं है। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय गिरोह सक्रिय हैं, जिनके तार दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़े हो सकते हैं। इसी तरह सोना और विदेशी मुद्रा की तस्करी से काले धन और हवाला नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका भी जताई जा रही है।
हालांकि गया एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कदम उठाए गए हैं, लेकिन बार-बार हो रही बरामदगी यह संकेत दे रही है कि तस्कर सुरक्षा जांच में खामियों का फायदा उठा रहे हैं। अब एजेंसियां एयरपोर्ट पर निगरानी बढ़ाने, खुफिया तंत्र को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय समन्वय पर जोर देने की तैयारी में जुट गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो गया एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय तस्करी के एक स्थायी ट्रांजिट पॉइंट के रूप में बदनाम हो सकता है, जिसका असर बिहार की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा छवि पर भी पड़ेगा।
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