बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) में प्रोफेसर की नौकरी से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां अनुभव प्रमाणपत्र के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किए जाने का खुलासा हुआ है। विश्वविद्यालय के ही एक कॉलेज से एक असिस्टेंट प्रोफेसर को दो अलग-अलग विषयों—फिजिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स—का अनुभव प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि उक्त शिक्षक को दोनों विषयों में पढ़ाने का अनुभव दर्शाया गया, जबकि नियमों के अनुसार एक शिक्षक को एक ही विषय का अनुभव मान्य होता है। इसी फर्जी या संदिग्ध अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने अभ्यर्थियों को अनुभव के 10 अतिरिक्त अंक दे दिए और सहायक प्राध्यापक की नौकरी भी मिल गई।
बीआरएबीयू में इन दिनों अनुभव प्रमाणपत्रों की गहन जांच चल रही है। जांच के दौरान लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिससे पूरी बहाली प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच में और भी कई कॉलेजों से जारी संदिग्ध अनुभव प्रमाणपत्रों की परतें खुल सकती हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों और संबंधित कॉलेजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस खुलासे के बाद ईमानदारी से आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों में नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
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