ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की वैधता एक साल, वित्तीय वर्ष से नहीं जुड़ी मानी जाएगी: राज्य आयोग


आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाण पत्र को लेकर राज्य आयोग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। आयोग ने कहा है कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की वैधता उसके जारी होने की तिथि से एक वर्ष तक होती है, इसे वित्तीय वर्ष की समाप्ति से जोड़कर नहीं देखा जाएगा। इस संबंध में उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग ने सभी जिलों में स्पष्ट सूचना जारी कराने का निर्देश दिया है।

बुधवार को मुजफ्फरपुर कलेक्ट्रेट में अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक के दौरान यह मामला आयोग के संज्ञान में आया। इस पर आयोग ने साफ कहा कि कई जगह प्रमाण पत्र को वित्तीय वर्ष से जोड़कर भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है, जो नियमसंगत नहीं है।

उच्च जाति के आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों पर फोकस

समीक्षा बैठक के दौरान आयोग ने जनप्रतिनिधियों और आम लोगों से उच्च जाति के आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के विकास को लेकर सुझाव भी मांगे, ताकि आगे चलकर ठोस प्रस्ताव तैयार कर उन्हें लागू कराया जा सके।

इस अवसर पर आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचन्द्र प्रसाद सिंह, उपाध्यक्ष राजीव रंजन और सदस्य जय कृष्ण झा मौजूद रहे। अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अंचल स्तर पर स्वीकृत और अस्वीकृत ईडब्ल्यूएस आवेदनों की सूची एक माह के भीतर उपलब्ध कराई जाए

आवेदन निष्पादन का आंकड़ा सामने आया

वरीय उप समाहर्ता ने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 में कुल 6270 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 6222 आवेदनों का निष्पादन कर दिया गया है।

तीन साल वैधता और आरटीई में आरक्षण की मांग

समीक्षा के दौरान उपस्थित बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की वैधता तीन साल किए जाने का सुझाव दिया। साथ ही निजी स्कूलों में आरटीई के तहत ईडब्ल्यूएस वर्ग को भी आरक्षण का लाभ देने की मांग उठाई गई।

आयोग ने अन्य वर्गों के लिए संचालित योजनाओं से अब तक कितना लाभ मिला है, इसका भी विस्तृत आंकड़ा मांगा है, ताकि उसी आधार पर उच्च जाति के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके

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