बिहार के भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर राज्यभर में किसानों का निबंधन (फार्मर रजिस्ट्री) अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया किसानों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। संयुक्त जमाबंदी के कारण बड़ी संख्या में किसान निबंधन नहीं करा पा रहे हैं और उन्हें शिविरों से लौटा दिया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि संयुक्त जमाबंदी के चलते उनके नाम से अलग-अलग भूमि विवरण दर्ज नहीं हो पा रहा है। इस वजह से वे अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई जगहों पर सुधार की प्रक्रिया लंबी होने के कारण किसान निराश लौट रहे हैं।
दरअसल, राज्य सरकार ने एलपीसी, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य कर दिया है। निबंधन नहीं होने की स्थिति में किसानों को इन योजनाओं से वंचित होना पड़ सकता है।
किसान संगठनों का कहना है कि सरकार को संयुक्त जमाबंदी वाले मामलों में सरल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि वास्तविक किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। वहीं, प्रशासन का दावा है कि समस्याओं के समाधान के लिए समीक्षा की जा रही है और जरूरत पड़ने पर दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
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