Yogi Adityanath के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार के बारे में चर्चा है कि चुनाव से ठीक पहले 100 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने की तैयारी की जा रही है। यदि ऐसा फैसला होता है, तो इसे सरकार का बड़ा राजनीतिक और सामाजिक कदम माना जाएगा। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में हलचल जरूर पैदा कर दी है।
आम जनता को सीधी राहत
100 यूनिट मुफ्त बिजली का सबसे बड़ा फायदा निम्न और मध्यम वर्ग के परिवारों को मिलेगा। ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों के लिए बिजली बिल एक बड़ा खर्च होता है। अगर 100 यूनिट तक की खपत पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता, तो लाखों उपभोक्ताओं को सीधी आर्थिक राहत मिल सकती है। इससे घरेलू बजट पर दबाव कम होगा और सरकार के प्रति सकारात्मक संदेश जाएगा।
राजनीतिक दृष्टि से ‘मास्टर स्ट्रोक’?
चुनावी वर्ष में ऐसी योजनाएं अक्सर निर्णायक भूमिका निभाती हैं। मुफ्त बिजली, पानी या अन्य सुविधाएं मतदाताओं को सीधे प्रभावित करती हैं। कई अन्य राज्यों में भी मुफ्त बिजली योजनाएं लागू हैं और वहां यह एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी यह कदम सत्तारूढ़ दल के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है।
सरकार का पक्ष
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री A. K. Sharma ने संकेत दिया है कि पिछले छह वर्षों से बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार पहले से ही उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाल रही है। ऐसे में यदि मुफ्त बिजली की योजना आती है, तो सरकार इसे जनहितैषी कदम के रूप में प्रस्तुत कर सकती है।
आर्थिक चुनौती भी कम नहीं
हालांकि मुफ्त बिजली योजना से जनता को राहत मिलेगी, लेकिन इससे राज्य की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। सरकार को सब्सिडी के रूप में अतिरिक्त बजट का प्रावधान करना होगा। यदि वित्तीय संतुलन नहीं बना, तो इसका असर राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
100 यूनिट मुफ्त बिजली की संभावित योजना उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। यह फैसला जहां एक ओर जनता को राहत देगा, वहीं दूसरी ओर सरकार के लिए आर्थिक प्रबंधन की चुनौती भी लेकर आएगा। अब सबकी नजरें सरकार की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं कि क्या यह चर्चा हकीकत में बदलती है या सिर्फ चुनावी अटकलों तक सीमित रहती है।