पटना/नई दिल्ली:
साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मंगलवार, 3 मार्च 2026 को लगेगा। यह खण्डग्रास चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा का कुछ हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढक जाएगा। यह खगोलीय घटना भारत के साथ-साथ एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका समेत कई देशों में देखी जा सकेगी।
क्या होता है खण्डग्रास चंद्र ग्रहण?
जब चंद्रमा का केवल एक हिस्सा पृथ्वी की छाया (अम्ब्रा) में प्रवेश करता है, तब उसे खण्डग्रास चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा पूरा लाल नहीं होता, बल्कि उसका एक भाग गहरा दिखाई देता है।
भारत में बच्चों और आम लोगों के लिए क्या रहेगा खास?
यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए शौकिया खगोल प्रेमी और आम लोग इसे नग्न आंखों से भी देख सकेंगे। साफ आसमान होने पर दृश्य और बेहतर होगा।
धार्मिक दृष्टि से सूतक काल रहेगा या नहीं?
खण्डग्रास चंद्र ग्रहण होने के कारण कई जगहों पर सूतक काल मान्य होता है। मंदिरों में नियमों के अनुसार दर्शन-पूजन पर अस्थायी रोक लग सकती है। हालांकि, सूतक को लेकर स्थानीय परंपराओं में फर्क हो सकता है।
चंद्र ग्रहण देखने के लिए जरूरी सावधानियां
- चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों से देखना सुरक्षित होता है
- दूरबीन या टेलीस्कोप से देखने पर दृश्य और स्पष्ट दिखेगा
- बच्चों को भी यह खगोलीय घटना दिखा सकते हैं
क्यों खास है यह चंद्र ग्रहण?
यह साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण है और एक साथ कई महाद्वीपों में दिखाई देगा, जिससे दुनियाभर के लोग इस खगोलीय घटना के साक्षी बन सकेंगे।