जयमाल से पहले बेहोश हुई दुल्हन, बारात लौटते ही टूट गया रिश्ता; अस्पताल में भर्ती रानी कुमारी का दर्द छलका


भोजपुर जिले के छोटकी सनदिया गांव से एक बेहद भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां शादी की खुशियों के बीच दुल्हन के बीमार पड़ते ही दूल्हे पक्ष ने इंसानियत छोड़ दी और पूरी बारात लेकर वापस लौट गया। इस घटना के बाद दुल्हन रानी कुमारी को गहरा मानसिक आघात पहुंचा है और वह अस्पताल में भर्ती है।

रानी कुमारी की शादी 20 फरवरी को उदवंतनगर के छोटा सासाराम निवासी जयप्रकाश शर्मा से तय थी। 14 फरवरी को तिलक और 19 फरवरी को हल्दी की रस्म पूरी हो चुकी थी। शादी की तैयारियां पूरी थीं, घर में मेहमानों की आवाजाही और ढोल-नगाड़ों की गूंज थी। लेकिन जयमाल से ठीक पहले द्वारपूजा के दौरान रानी अचानक भावुक होकर बेहोश हो गई।

घबराए परिजन उसे तुरंत आरा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां करीब तीन घंटे तक इलाज चला। अस्पताल में भर्ती रानी के हाथों में अभी भी मेहंदी लगी हुई थी और ड्रिप चढ़ रही थी। डॉक्टर आरएन यादव ने बताया कि कमजोरी की वजह से चक्कर आया था, बाकी सभी जांच सामान्य हैं।

इधर, दुल्हन के ठीक होने का इंतजार करने के बजाय दूल्हा पक्ष बारात लेकर लौट गया। आरोप है कि दूल्हा जयप्रकाश शर्मा ने फोन उठाना भी बंद कर दिया। अगले दिन दहेज में दी गई बाइक वापस भेजते हुए फिलहाल शादी से इनकार कर दिया गया।

जब रानी को यह पता चला कि उसकी बारात लौट गई है और शादी टूट गई है, तो वह दोबारा बेहोश हो गई। अस्पताल में रोते हुए उसने कहा, “मेरी जिंदगी खराब हो गई… अब मुझसे शादी कौन करेगा? पापा ने कर्ज लेकर शादी की तैयारी की थी।” बेटी की हालत देखकर मां भी खुद को संभाल नहीं पा रही हैं और लगातार उसे ढांढस बंधा रही हैं।

रानी के पिता सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि शादी की तैयारियों में लाखों रुपये खर्च हो चुके थे। महीनों की मेहनत और उम्मीदें एक पल में टूट गईं। गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और लोग दूल्हा पक्ष के व्यवहार को अमानवीय बता रहे हैं।

यह घटना एक बार फिर समाज के सामने गंभीर सवाल खड़े करती है। बीमारी या कमजोरी जैसी छोटी बातों पर रिश्ता तोड़ देना और दहेज लौटाकर शादी से इनकार करना मानसिकता पर सवालिया निशान लगाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं सिर्फ एक परिवार को नहीं, बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर करती हैं कि शादी जैसे रिश्ते को इंसानियत और संवेदनशीलता के साथ निभाना क्यों जरूरी है।


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