संवाद
अक्सर लोग मूंगफली खाने के बाद उसके छिलकों को बेकार समझकर या तो फेंक देते हैं, या फिर सीधे गमलों और पौधों की मिट्टी में डाल देते हैं। लेकिन मशहूर पर्यावरणविद् पीपल बाबा के अनुसार यह आदत पौधों के लिए फायदेमंद नहीं, बल्कि नुकसानदेह साबित हो सकती है।
पीपल बाबा बताते हैं कि मूंगफली के छिलके काफी सख्त होते हैं। जब इन्हें सीधे मिट्टी में डाल दिया जाता है, तो ये मिट्टी की नमी को सोख लेते हैं और जल्दी गलते भी नहीं हैं। इस प्रक्रिया के दौरान छिलके मिट्टी से नाइट्रोजन खींच लेते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार (ग्रोथ) रुक सकती है और पौधा कमजोर हो सकता है।
इसके अलावा, सीधे डाले गए मूंगफली के छिलकों के नीचे चींटियां और फंगस पनपने का खतरा भी बढ़ जाता है। ये कीट और फंगल संक्रमण पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे पौधा धीरे-धीरे खराब होने लगता है।
पीपल बाबा का कहना है कि अगर मूंगफली के छिलकों का सही इस्तेमाल करना है, तो उन्हें खाद (कम्पोस्ट) बनाकर ही उपयोग करना चाहिए। कम्पोस्ट बनने के बाद छिलके पूरी तरह सड़-गल जाते हैं और मिट्टी को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसे पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
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