दिल्ली यूनिवर्सिटी की आर्ट्स फैकल्टी गेट के बाहर UGC से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों ने सियासी और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। इसी प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें बहुजन समाज से आने वाली छात्रा मेघा लवारिया “ब्राह्मणवाद जिंदाबाद” के नारे लगाती दिख रही हैं।
यह वीडियो सामने आने के बाद मेघा को ब्राह्मण समझकर सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा। इसके बाद मेघा ने सार्वजनिक रूप से अपनी पहचान स्पष्ट करते हुए कहा—
“मैं ब्राह्मण नहीं हूं। लेकिन फिर भी ब्राह्मणों के साथ हूं।”
DU आर्ट्स फैकल्टी के बाहर हिंसक झड़प
UGC नीतियों और कैंपस से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय की आर्ट्स फैकल्टी गेट के बाहर लेफ्ट और राइट विंग से जुड़े छात्र संगठनों के बीच झड़प हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस को दखल देना पड़ा।
घटना के बाद कई छात्रों को मॉरिस नगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां बाहर नारेबाजी के वीडियो वायरल हुए।
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और पहचान का विवाद
वीडियो वायरल होने के बाद मेघा लवारिया को जातीय पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया। कई यूज़र्स ने उन्हें ब्राह्मण मानकर आलोचना की। इसके जवाब में मेघा ने कहा कि उनका समर्थन किसी जाति की श्रेष्ठता के लिए नहीं, बल्कि नफरत और भेदभाव के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक है।
कैंपस पॉलिटिक्स में नई बहस
मेघा के बयान के बाद विश्वविद्यालय परिसरों में जाति, पहचान और राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है।
- समर्थक इसे जातिवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश बता रहे हैं।
- आलोचक मानते हैं कि “ब्राह्मणवाद” जैसे शब्दों का इस्तेमाल सामाजिक रूप से संवेदनशील है और इससे ध्रुवीकरण बढ़ सकता है।
यह मामला सिर्फ एक नारे या एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा। इसने कैंपस पॉलिटिक्स में विचारधारात्मक टकराव और सोशल मीडिया ट्रोलिंग की संस्कृति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा छात्र राजनीति में और गहराई से चर्चा का विषय बन सकता है।
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रिपोर्ट: रोहित कुमार सोनू