वसंत नवरात्र 2026 आज से शुरू, हिंदू नववर्ष का भी हुआ शुभारंभ


आज 19 मार्च 2026, गुरुवार से पावन वसंत नवरात्र का शुभारंभ हो गया है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत् 2083 की भी शुरुआत मानी जाती है। यह नौ दिनों का पर्व शक्ति, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है।

🔱 नवरात्र का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

नवरात्र केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि यह शरीर और मन के शुद्धिकरण का भी समय माना जाता है। इस दौरान:

  • उपवास और सात्विक भोजन से शरीर डिटॉक्स होता है
  • ध्यान और साधना से मानसिक शांति मिलती है
  • बदलते मौसम के अनुरूप शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है

🪔 कलश स्थापना का महत्व

नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है, जो सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
स्टेशन चौक स्थित हनुमान प्रेम मंदिर के पुजारी पंडित पंकज झा शास्त्री के अनुसार:

  • कलश में सभी देवी-देवताओं, नवग्रहों और तीर्थों का वास माना जाता है
  • शास्त्रों के अनुसार:
    • मुख में भगवान विष्णु
    • कंठ में भगवान शिव
    • मूल में ब्रह्मा जी का निवास होता है
  • मध्य भाग में देवियों का वास होता है, जिससे यह भगवान गणेश का भी प्रतीक बनता है

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, मिट्टी के कलश में जल और जौ रखने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।

🌺 मां शैलपुत्री की पूजा से शुरुआत

नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

  • वे हिमालय की पुत्री (पार्वती) हैं
  • स्थिरता, शक्ति और तपस्या का प्रतीक हैं
  • यह दिन मूलाधार चक्र को जागृत कर जीवन में संतुलन लाने का संकेत देता है

📅 नवरात्र 2026 का पूरा कैलेंडर

19 मार्च (गुरुवार) – प्रतिपदा
➡️ मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना, हिंदू नववर्ष आरंभ

20 मार्च (शुक्रवार) – द्वितीया
➡️ मां ब्रह्मचारिणी पूजा

21 मार्च (शनिवार) – तृतीया
➡️ मां चंद्रघंटा पूजा

22 मार्च (रविवार) – चतुर्थी
➡️ मां कूष्मांडा पूजा, गणेश चौथ व्रत, छठ नहाय-खाय

23 मार्च (सोमवार) – पंचमी
➡️ मां स्कंदमाता पूजा, छठ खरना

24 मार्च (मंगलवार) – षष्ठी
➡️ मां कात्यायनी पूजा, सूर्य षष्ठी व्रत

25 मार्च (बुधवार) – सप्तमी
➡️ मां कालरात्रि पूजा, नवपत्रिका प्रवेश, छठ अर्घ्य

26 मार्च (गुरुवार) – अष्टमी
➡️ मां महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी

27 मार्च (शुक्रवार) – नवमी
➡️ मां सिद्धिदात्री पूजा, कन्या पूजन, राम नवमी

28 मार्च (शनिवार) – दशमी
➡️ विजया दशमी, देवी विसर्जन


🌼 निष्कर्ष

वसंत नवरात्र आस्था, अनुशासन और आत्मशुद्धि का पर्व है। यह हमें आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाते हुए नए साल की सकारात्मक शुरुआत का संदेश देता है।

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