भूपेंद्र पटेल की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार ने बड़े शहरों के चुनाव से पहले अपना अहम वादा पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से जुड़ा विधेयक पेश कर दिया है, जिस पर जल्द मुहर लगने की संभावना है।
इस प्रस्तावित कानून के तहत अब सभी धर्मों के लिए शादी, तलाक और विरासत के नियम एक समान होंगे। सरकार का कहना है कि इससे समाज में समानता और पारदर्शिता आएगी।
🔴 बहुविवाह पर कड़ी सजा
विधेयक के अनुसार, एक से अधिक शादी (बहुविवाह) करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान रखा गया है। यह कदम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
🔴 लिव-इन रिलेशनशिप पर भी नियम
अब “बिन फेर हम तेरे” वाला फॉर्मूला भी आसान नहीं रहेगा। यदि कोई जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे तय समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
🔴 शादी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
राज्य में शादी के बाद 2 महीने के अंदर रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होगा। यदि कोई ऐसा नहीं करता है, तो उसे ₹10,000 से ₹25,000 तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
🔴 तलाक के लिए नई शर्त
नए नियम के मुताबिक, शादी के कम से कम 1 साल बाद ही तलाक संभव होगा। इससे जल्दबाजी में लिए गए फैसलों को रोकने की कोशिश की गई है।
🔴 चुनाव से पहले बड़ा दांव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी शहरी चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। इससे सरकार अपने एजेंडे को मजबूत तरीके से जनता के सामने रखने की कोशिश कर रही है।
👉 कुल मिलाकर, गुजरात सरकार का यह कदम सामाजिक सुधार और कानूनी एकरूपता की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसका असर पूरे देश की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
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